
डॉ.संजुला सिंह, संजू, प्रसिद्ध लेखिका, जमशेदपुर
मेरा संसार था तुमसे
ये बाते जानते थे तुम
मेरा त्योहार था तुमसे
ये बातें मानते थे तुम ।
मुझे कुछ और ना कहना
पता ये बात थी तुमको
मुझे विश्वास था तुम पर
ये बातें जानते थे तुम ।
मैं तुम बिन टूट जाऊंगी
पता ये भी तो था तुमको
मैं तुम बिन जी ना पाऊंगी
खबर ये भी तो था तुमको
मगर फिर भी छला तुमने
अनेकों झूठ कर वादे
दिखाया ख्वाब सब झूठे
हदय में गम को हैं साधे ।
तुम्हारी रूह ना कांपी
हृदय तेरा नहीं धड़का
हृदय पाषाण का तेरा
लगाया झूठ का तड़का ।
यकीं ज्यादा किया हद से
सजा उसकी मिली मुझको
मगर तुम भूल मत जाना
मिलेगी भी सजा तुमको ।
सुंदर
Hriday pasan ka tera,,bahut hi khubsurat likha hai