
डॉ. कृष्णा जोशी, प्रसिद्ध कवयित्री, गुजराती कॉलेज, इंदौर
ऋतुओं का शुभ संयोग है, बसंत पंचमी है आज।
पृथ्वी-लोक की वनस्पति, बनी है आज सरताज।।
सरस्वती माँ प्रकट हुई हैं, हर्षित है नर-नार।
नमन करें हम शत-शत मैया, आज करो स्वीकार।।
बौद्धिकता प्रोत्साहित कर दो, विनय करूँ दिन-रैन।
पृथ्वी-लोक पर तुमने बिछा दी, ऐश्वर्यता की दैन।।
वसुंधरा इठलाती देखो, सरसों फूली इतराए।
ग्रीष्म ऋतु का प्रथम चरण है, टेसू खिल-खिल जाए।।
शीत का जाना, ग्रीष्म का आना, कोयलिया का गाना।
अम्बुआ की शाखें लहरातीं, सूर्य-किरणों का छा जाना।।
वसंत आया, वसंत आया, वातावरण से मन हर्षाया।
प्रीत के गीत कृष्ण ने गाए, बसंत-राग हर मन में समाया।।
सूर्य, चंद्रमा, दशों दिशाएँ, प्रकृति करती नाज़।
विद्यादायिनी माता शारदे, तुमसे ही सुर-साज़।।
ऋतुओं का है मिलन-समारोह, महक रहा घर-आँगन।
मातु शारदे, आज पधारो, शुभ अवसर है मनभावन।।
अति उत्तम कविता कृष्णा दीदी