
बिदाई
-गीता गैरोला
मैं पतझड़ में खड़ा पेड़ हूं
जिसे
अपनी पत्तियों को विदाई देनी है
जन्म के लिए मृत्यु उतनी ही जरूरी है
जितनी मृत्यु के लिए जन्म जरूरी है
मैं अपनी मिट्टी में उत्तप्त ऐसे खड़ी हूं
जैसे मरने से पहले
कोई प्रेम करने को आतुर खड़ा हो
या मरने के तुरंत बाद
जीवन और मृत्यु के बीच
नई हुलसन से भरा
बीते जनम का आखिरी प्रेम …