नया दिन, नई आशा

सुष्मिता हाल्दार, नई दिल्ली

सूरज की कोमल किरणों से सुनहरी आभा छाए,
प्रकृति के सुरम्य सानिध्य में दिन आरंभ हो जाए।
हृदय हरण हरित हरियाली करती हर्षित हिया,
हिंडोले सी हिल-डुलकर चलती जब-जब हवा।

नदियों की कल-कल करती, निर्मल धारा बहती,
चिड़ियों के चहकने से नींद सबकी खुलती।
जुट जाएँ कामकाज में, तजकर आलस अपना,
नए दिन में देखें सभी उमंगों भरा नया सपना।

पिछले दिन को याद बनाकर आगे बढ़ते जाएँ,
भविष्य को सुदृढ़ करने की जुगत नई लगाएँ।
जीवित हैं तो बाधा और विपत्ति आती-जाती रहेगी,
बावजूद इन सबके, ज़िन्दगी तो नहीं थमेगी।

डटकर, साहस दिखाकर जो लड़ेगा यह जंग,
सफलता उसे हासिल होगी मेहनत लाएगी रंग।
रुकना नहीं, झुकना नहीं, जब तक शरीर में ज़ोर,
चारों तरफ़ तभी गूंजेगा कामयाबी का शोर।

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