
सवेरे-सवेरे हम श्रीनगर से सोनमर्ग के लिए निकल पड़े. सोनमर्ग तक का सफर लगभग 80 कि.मी. का था लेकिन हमें यह नहीं पता था कि हमें उसके आगे भी लगभग 35 कि.मी. का स़फर, प्रसिद्ध जीरो-पॉइंट तक पहुंचने के लिए करना होगा.और यह सफर चक्करदार पहाड़ी सड़क पर करते हुए 11600 ़फीट की ऊंचाई पर स्थित जीरो पॉइंट तक पहुंचायेगा.
जीरो पॉइंट यानि काश्मीर का आखरी पड़ाव, जहाँ ग्लेशियर है, जहाँ सिंध नदी है, बर्फ से आच्छादित ऊँचे-ऊँचे पहाड़ , बर्फीली हवाएँ और ज़ोजिला दर्रा! यहाँ साल भर बर्फ जमी रहती है,
दिसंबर-जनवरी में तो तापमान माइनस 25-30 डिग्री सेल्सियस होता है. यह वही सड़क है जो श्रीनगर से लेह-लद्दाख़ तक चली जाती है.
सर्पीली, बर्फीली ..जिस पर वाहन चलने के लिए, सर्दियों में, चक्कों में लोहे की जंजीर का फंदा लगाना पड़ता है, जो बर्फ को पकड़े रहती है अन्यथा वाहन फिसलकर सैकड़ों फीट गहरी खाइयों में समा सकता है.

जीरो पॉइंट से आगे कारगिल का इलाका आरम्भ हो जाता है और उससे लगा हुआ पाकिस्तान का इलाका भी.
इसी दुर्गमता की आड़ में सन 1999 में, पाकिस्तान ने चुपके से कारगिल के बर्फीले पहाड़ों में घुसपैठ कर ली थी.
वह वास्तव में बहुत ही दुर्गम इलाका है.
हमारी भारतीय सरकार इस दुर्गम इलाके में , आकाश छूते हुए पहाड़ों में सुराख़ करते हुए ज़ोजिला टनल का निर्माण कर रही है, यह कार्य कितना कठिन है यह आप स्वयं देखकर ही अंदाज़ लगा सकेंगे ! पूरे 15 कि.मी. का टनल. इंजीनियरिंग का कमाल.
सोनमर्ग से जीरो पॉइंट जाने के लिए आपको अपना वाहन छोड़कर दूसरा वाहन किराये पर लेना होगा जिसका किराया 7-8 हज़ार रुपये होता है. यह लगभग 35-40 कि.मी. की सैर है, बीच बीच में अनेक सुन्दर जगहें आती है जहाँ आप वाहन रोककर फोटोग्राफ्स ले सकते हैं.
सोनमर्ग के पहाड़ बहुत सुन्दर , हरियाली से भरे हैं लेकिन जैसे जैसे ऊंचाई पर हम चढ़ते हैं, हरियाली कम होती जाती है और पहाड़ बर्फ से ढँक जाते हैं, जिनकी अपनी खूबसूरती होती है. यदि आप श्रीनगर में ठहरें है और एक दिन में ही सोनमर्ग की सैर करके रात तक वापस लौटना है तो यात्रा थकानभरी हो सकती है इसलिए यदि रात में सोनमर्ग में ही रुक जाएं तो अच्छा होगा.
क्या हमें ज्ञात है कि हम प्रकृति की ओर क्यों आकर्षित होते हैं ?… क्योंकि हमारी उत्पत्ति प्रकृति से ही है ! हममें वही तत्व हैं जो प्रकृति में हैं… प्रकृति हमारे दिल-ओ-दिमाग़ को खुशियों से भर देती है , प्यार से भर देती है.
ज़िन्दगी छोटी है इसलिए जितना हो सके परिवार के साथ प्रकृति निहारें, आपस में खूब प्यार करें, क्योंकि प्रकृति भी कहती है कि यदि मेरी तरह सुन्दर बनना है तो आपस में प्यार कर लो …

अगला पड़ाव … गुलमर्ग !

अनुपम नीता बर्डे, प्रसिद्ध व्यंग्यकार, बिलासपुर
जीवन से भरपूर सुन्दर आलेख
मेरी यात्रा कथा को अपनी वेब पत्रिका में शामिल करने के लिये हृदय से धन्यवाद 🙏🏻