
अर्चना मिश्रा, प्रसिद्ध लेखिका बोकारो, (झारखंड)
है रंजो-ग़म
बदली-सी
आबो-हवा।
उखड़ी हुई
साँसों की तरह
ढहता मकाँ।
था कभी…
बच्चों की चहचहाहट,
माँ-बाबा का बतियाना।
दिल ढूँढता है
फिर से वही
आबोदाना…।

अर्चना मिश्रा, प्रसिद्ध लेखिका बोकारो, (झारखंड)
है रंजो-ग़म
बदली-सी
आबो-हवा।
उखड़ी हुई
साँसों की तरह
ढहता मकाँ।
था कभी…
बच्चों की चहचहाहट,
माँ-बाबा का बतियाना।
दिल ढूँढता है
फिर से वही
आबोदाना…।
बेहद मार्मिक रचना