किसी भी तरह की स्वास्थ्य की समस्या के पीछे सूर्य ही होता है. सूर्य के मजबूत होने से जीवन की लगभग हर समस्याएं हल होती चली जाती हैं. प्रातः कालउठकर सूर्य को अर्घ्य देना लाभकारी होता है.
भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में सूर्य को देवता का दर्जा प्राप्त है. वह केवल आकाश में चमकता हुआ तारा नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि की चेतना, ऊर्जा और स्वास्थ्य का आधार है. सूर्य को प्रतिदिन अर्घ्य देने की परंपरा केवल एक धार्मिक कृत्य नहीं, बल्कि विज्ञान, मनोविज्ञान और ज्योतिष से भी गहराई से जुड़ी हुई प्रक्रिया है. यह लेख आपको सूर्य को अर्घ्य देने की विधि, उसके लाभ, विशेष प्रयोजन से जल अर्पण के उपाय, और सावधानियों के साथ जीवन को कैसे सकारात्मक बनाया जाए इसकी विस्तृत जानकारी देगा.
सूर्य का महत्व:
वैदिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य स्वास्थ्य, राज्य, औषधि, पिता और अन्न का कारक ग्रह है. यह जीवन में यश, प्रतिष्ठा और अधिकार दिलाने में सहायक होता है. आयुर्वेद में भी सूर्य की किरणों को रोग निवारण के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना गया है. यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य कमजोर हो तो उसे शारीरिक कष्ट, आत्मविश्वास की कमी, और जीवन में दिशाहीनता जैसी समस्याएं घेर लेती हैं. ऐसे में सूर्य को अर्घ्य देना एक सशक्त समाधान है.
अर्घ्य देने की विधि:
समय -उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देना सबसे शुभ माना जाता है. सूर्य के नवोदित रहते समय तक अर्घ्य दिया जा सकता है.
स्थान -यह क्रिया नदी, तालाब या अपने घर की छत या आंगन में की जा सकती है.
पूर्व तैयारी -अर्घ्य देने से पहले स्नान अवश्य करें और यदि संभव हो तो सफेद वस्त्र पहनें.
सामग्री -लोटे या मिट्टी के पात्र में जल भरें.
प्रक्रिया- सूर्य की ओर मुख करके दोनों हाथों से जल को धीरे-धीरे अर्पित करें, जिससे कि जल की धार सूर्य की ओर जाते हुए दिखाई दे.
विशेष प्रयोजन के लिए विशेष अर्घ्य:
साधारण जल में कुछ सामग्री मिलाकर विशेष लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं:
शिक्षा और एकाग्रता के लिए नीला रंग मिलाएं.
ऊर्जा और स्वास्थ्य के लिए रोली या लाल चंदन
विवाह हेतु हल्दी का प्रयोग करें.
इंटरव्यू या परीक्षा में सफलता के लिए लाल गुड़हल का फूल जल में डालें.
पितृ शांति हेतु तिल और अक्षत मिलाकर अर्पित करें.
समग्र जीवन लाभ हेतु सादा जल ही सर्वोत्तम है.
सावधानियाँ:
अर्घ्य देने से पूर्व स्नान आवश्यक है.
बहुत देर से यानी जब सूर्य की तेज़ किरणें आंखों को चुभने लगे तब जल नहीं चढ़ाना चाहिए.
जल चढ़ाने के बाद सूर्य मंत्र (जैसे ॐ सूर्याय नमः) का जप करें
जल के छींटे यदि पैरों पर पड़ जाएं तो कोई दोष नहीं माना जाता.
जो भी व्यक्ति सूर्य को अर्घ्य देता है, उसे अपने पिता और परिवार के प्रति विशेष श्रद्धा रखनी चाहिए.
सूर्य को मजबूत करने के अन्य उपाय
रविवार के दिन व्रत रखना
.सूर्य मंत्रों का नियमित जप करना.
तांबे का छल्ला या सूर्य यंत्र धारण करना.
रुद्राक्ष की माला से ॐ घृणि सूर्याय नमः का 108 बार जाप करना
सूर्य अर्घ्य केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि एक जीवंत आध्यात्मिक और व्यवहारिक विज्ञान है. यह क्रिया आत्मशक्ति, मानसिक स्थिरता, और ग्रहों की अनुकूलता प्राप्त करने का सरल लेकिन प्रभावशाली माध्यम है. अगर आप जीवन में स्वास्थ्य, यश, आत्मबल और सफलता चाहते हैं, तो प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य देना आरंभ करें यह निश्चित ही आपके जीवन में उजाला भर देगा.

सुरेश परिहार, वरिष्ठ पत्रकार,पुणे
जय हो
सूर्योपासना एवम् सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने का नियम आदि जानकर अच्छा लगा ।
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बहुत बढ़िया भाई साहब