उठो, जागो

अंजलि सिंह अंशु, प्रसिद्ध लेखिका, पुणे

उठो, जागो, लक्ष्य न खोना,
यही विवेकानंद का था कहना।
निडर बनो, बलवान बनो,
अपने भीतर ईश्वर को पहचानो।

युवा शक्ति का दीप जलाया,
भारत को आत्मगौरव सिखाया।
सेवा, त्याग और कर्म महान,
इन्हीं से बनता सशक्त इंसान।

न धर्म से ऊँचा कुछ बताया,
मानवता को सबसे ऊपर बिठाया।
विचारों से बदली दुनिया सारी,
विवेकानंद की वाणी है न्यारी।

आज जयंती पर प्रण लें हम,
चलें सत्य-पथ, करें शुभ कर्म।
गुरुजी के सपनों का भारत बने,
जहाँ ज्ञान, शक्ति और प्रेम सजे।

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