साहित्यिक चमत्कार

हित्य में अब चमत्कारों की कोई कमी नहीं रही। कुछ लेखक तो इतने पारंगत हो गए हैं कि बीस कहानियों को छह अलग-अलग पुस्तकों में बाँटकर छाप देते हैं—हर पुस्तक में पाँच कहानियाँ कॉमन! और जब यह भी कम पड़ता है तो बालकथा और कविता की पतली-पतली किताबें छपवाकर अपने खाते में पुस्तकों की संख्या बढ़ा लेते हैं।पाठक भी भाग्यशाली होते हैं—उन्हें एक ही कहानी पाँच–छह बार, अलग-अलग शीर्षकों से पढ़ने का अवसर मिलता है।

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राहें और मंज़िल

हर व्यक्ति की मंज़िल एक ही होती है, पर रास्ते अलग-अलग होते हैं। कोई सीधा लिफ्ट लेकर अपनी मंज़िल तक पहुँच जाता है, तो कोई धैर्य और परिश्रम के साथ सीढ़ियाँ चढ़ता है। वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो पहले स्वयं सीढ़ियाँ बनाते हैं और फिर उसी पर चढ़कर अपनी ऊँचाई तक पहुँचते हैं। अंततः सबको अपनी-अपनी राह चुननी पड़ती है। तय करना होता है कि कौन-सा रास्ता उसका है, और फिर बिना रुके, बिना थके बस आगे बढ़ते जाना होता है। जो कदम बढ़ाता है, वही मंज़िल तक पहुँचता है।

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पर्यावरण संरक्षण के लिए पुणेकरों ने चलायी साइकिल

पुणे: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिवस पर राज्यसभा सांसद प्रा. डॉ. मेधा कुलकर्णी की पहल से आयोजित ‘पुणे ऑन पेडल्स’ साइकिल रैली और वॉकथॉन में हजारों पुणेकरों ने भाग लेकर शारीरिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर 75 जरूरतमंद बच्चों को साइकिल वितरण भी किया गया।

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इंदौर प्रेस क्लब का चुनाव कल

देश में कभी अपनी विशिष्ठ पहचान रखने वाले इंदौर प्रेस क्लब के हर तीन वर्ष में होने वाले चुनाव करीब छह साल बाद हो रहे हैं । मतदान 14 सितंबर रविवार को होना है। क्लब के विधान मुताबिक कोई भी सदस्य प्रमुख पद के लिये दो बार चुनाव लड़ सकता है, वर्तमान अध्यक्ष अरविंद तिवारी की तरह पूर्व अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल भी दो बार चुनाव लड़ चुके हैं, इसलिये दोनों चुनावी रेस से बाहर हो गए हैं। महत्वपूर्ण यह कि पद पर रहे ये दोनों ही अध्यक्ष आरोपों के भी शिकार हुए हैं और बात कोर्ट तक भी पहुंची है।

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मस्‍त हवा का इक झौंका

यह कविता मां और बच्चों के प्रेम और यादों की भावनाओं को उजागर करती है। जीवन में अलगाव, पालन-पोषण और अंततः मातृत्व के अद्भुत बंधन को दर्शाती यह कविता भावनात्मक और मार्मिक है। प्रत्येक पंक्ति में माँ और बच्चे के बीच के गहरे प्यार और यादों का सौंदर्य दिखाई देता है।

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हिन्दी से है मेरी पहचान

यह कविता हिंदी भाषा के प्रति प्रेम और गर्व को उजागर करती है। हिंदी केवल हमारी मातृभाषा ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, ज्ञान और संस्कारों का प्रतीक भी है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि हिंदी हमारे जीवन, साहित्य और राष्ट्र की आत्मा का अभिन्न हिस्सा है।

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तू ही मेरा श्रृंगार

सविता सिंह मीरा, प्रसिद्ध कवयित्री, जमशेदपुर संस्कार, सदाचार,विचार, आचार —तू ही मेरा श्रृंगार। अलंकार, उपहार,आकार, निराकार —सब तेरे ही हैं प्रकार। नदी, पोखर, ताल, तलैया,तू ही सबकी खेवईया।शाखा, वल्लरी, द्रुम, लता,प्रकृति की सुंदर छटा।वर्षा, ओस, बादल, घटा,खग, मृग, बाल गोपाल,राम, केशव, नंदलाल। धूप, छाँव, अंबर, धरा —यह सब तो तेरे हैं रूप।तू ना हो तो…

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सीकर में बजाज ट्रस्ट के ध्येय महोत्सव का भव्य शुभारंभ

राजस्थान के सीकर में सातवें “ध्येय महोत्सव” का भव्य शुभारंभ हुआ। इस आयोजन में ग्रामीण विकास, फसल विविधीकरण, बागवानी और आत्मनिर्भर गाँवों के निर्माण पर विचार साझा किए गए। बजाज फाउंडेशन, जमनालाल कनिराम बजाज ट्रस्ट और विश्व युवक केंद्र के सहयोग से आयोजित यह महोत्सव ग्रामीण सशक्तिकरण और सतत विकास के लिए प्रेरक मंच बन गया। आगामी दिनों में कार्यशालाएँ और फील्ड विज़िट्स आयोजित की जाएँगी।

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तुम “तारा” हो

तुम मेरे आकाशगंगा का तारा हो—जो मेरे ख्वाहिशों के लिए टूटने को तैयार रहती हो, अपनी खुशियों, समय और संसाधनों को बटोरकर भी प्रकाश फैलाती रहती हो। तुम मुझे सपने सच करने का साहस देती हो और सिखाती हो कि दूसरों के लिए भी तारा बनना संभव है।

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उस शाम…

उस शाम का मौन बहुत कुछ कह गया। आपके कहने का इंतज़ार नहीं था मुझे, क्योंकि आपकी नज़रें और आपकी ख़ामोशी ही मेरे दिल तक उतर आई थीं। वह अहसास किसी अनदेखी धारा की तरह मेरे हृदय को छूता चला गया। आसमान पर टिमटिमाते तारे हमारे साक्षी बने और हरसिंगार की महक ने आपके मन की अनकही बात मुझ तक पहुँचा दी। हम आमने-सामने थे, और ऐसा लगा जैसे हमारे दिलों के द्वार सदियों से एक-दूसरे की प्रतीक्षा कर रहे हों। दूर तक फैली चाँदनी ने हमें घेर लिया और हरसिंगार की माला ने हमारी आत्माओं को एक सूत्र में बाँध दिया। उस पल न समय का कोई बंधन था, न दूरी की कोई दीवार—बस आप थे, मैं थी और हमारा गहरा, मौन प्रेम।

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