खाने की पसंद-नापसंद: स्वाद से ज़्यादा मन का खेल
“मशरूम का स्वाद हो या मटन-फिश का, कई बार भोजन के प्रति हमारी पसंद-नापसंद सिर्फ स्वाद की बात नहीं होती। यह हमारी परवरिश, संस्कृति और बचपन की थाली का असर होता है। जब कभी आपसे कोई आग्रह करे कि ‘बस एक बार टेस्ट कर लो’, तो याद रखिए—हर स्वाद के पीछे एक स्मृति होती है। मशरूम को लेकर मन की दूरी, स्वाद कलिकाओं की नहीं, बल्कि गहरे संस्कारों और भावनाओं की कहानी है। खाने का चुनाव शरीर और आत्मा दोनों की सहमति से होता है।”