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सूर्य को अर्घ्य देने से मिलते हैं स्वास्थ्य, यश और सफलता

सूर्य केवल प्रकाश और ऊर्जा का स्रोत नहीं है, बल्कि वह हमारे जीवन के स्वास्थ्य, सफलता, यश और राज्य पद का भी कारण है। नियमित रूप से सूर्य को अर्घ्य देने से न केवल नौ ग्रह अनुकूल होते हैं, बल्कि जीवन की बड़ी से बड़ी समस्याएं भी हल होती चली जाती हैं। जानिए सूर्य को अर्घ्य देने की सही विधि, विशेष उद्देश्य अनुसार उपाय और जरूरी सावधानियां।

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नारी

नारी केवल एक शब्द नहीं है, बल्कि जीवन का उद्घोष है। नारी कई रूपों में विघटित है, गणना से परे, क्योंकि इसके रूप तो अगणित हैं। आज नारी अबला नहीं, बल्कि सबला बनकर अपने अधिकार और सम्मान के परचम लहरा रही है।

पुरुष प्रधान जगत में नारी अब पुरुष से कम नहीं है। नारी पृथ्वी की शक्ति है; बिना नारी के जगत शक्ति विहीन है। संपूर्ण सृष्टि में नारी के बिना सब कुछ ही अधूरा और स्तरहीन है। नारी केवल कामिनी नहीं, शस्त्र-शास्त्र की पर्याय है। नारी केवल जन्मदाता नहीं, बल्कि कभी-कभी मृत्यु भी बन जाती है।

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बरसात, भक्ति और मेला

“बरसात से लबालब भरे गाँव का दृश्य। चारों ओर पानी ही पानी, ताल-तलैया और खेतों में भरे जल के बीच पगडंडी डूबी हुई है। कुछ ग्रामीण घुटनों तक कपड़ा उठाए, हाथ में चप्पल पकड़े सावधानी से रास्ता पार कर रहे हैं। बच्चे किनारे पर खड़े हँसते-खिलखिलाते तालियाँ बजा रहे हैं। दूर खुले-खुले पैतृक घर और हरसिंगार का पेड़ दिख रहा है, जिसकी झरती कलियाँ पूजा के लिए टोकरी में भरी जा रही हैं। पृष्ठभूमि में गाँव का दुर्गा पूजा पंडाल, मिट्टी की प्रतिमा, जलते दीपक और ढाक-वादन से गूँजता भक्तिमय वातावरण दिखाई दे रहा है।”

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6/11 मुंबई आतंकी हमले के दौरान ताज होटल में अपने परिवार के साथ डरी हुई ज़ीनत – भावनात्मक हिंदी कहानी

आख़िरी रात

ज़ीनत की ज़िंदगी बागबानी, परिवार और अपने छात्रों के बीच खुशी से बीत रही थी। शादी की सालगिरह मनाने के लिए वह अपने पति फ़रीद और बेटे के साथ मुंबई के ताज होटल पहुँचती है। लेकिन 26 नवंबर 2008 की वह रात उनकी ज़िंदगी की सबसे भयावह रात बन जाती है। गोलियों, धमाकों और दहशत के बीच यह कहानी सिर्फ़ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि इंसानियत, प्रेम और आतंकवाद के खिलाफ़ खड़े होने वाले साहस की भी मार्मिक दास्तान है।

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दो नैतिकताएँ: रिश्तों में स्त्री-पुरुष के दोहरे चरित्र की पड़ताल

चरित्र का तराजू

जब एक ही रिश्ते में पुरुष की आज़ादी को अधिकार और स्त्री की आज़ादी को चरित्र का सवाल बना दिया जाए, तो समस्या सिर्फ रिश्ते में नहीं, बल्कि उस सोच में होती है जो दोनों के लिए अलग-अलग नैतिकता तय करती है।

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नवरात्रि पर्व का हिन्दू धर्म में महत्त्व

“नवरात्रि का महत्त्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, आत्मबल और मानवीय जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला पर्व है। नौ रातों तक माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना से भक्त अपने जीवन में शक्ति, साहस, ज्ञान और भक्ति का विकास करते हैं। उपवास और संयम शरीर को शुद्ध करते हैं, जबकि ध्यान, पूजा और मंत्रजप मन और आत्मा को पवित्र बनाते हैं।

यह पर्व हमें यह शिक्षा देता है कि सत्य और धर्म की विजय निश्चित है, जबकि असत्य और अधर्म का अंत होना अवश्यंभावी है। नवरात्रि का सांस्कृतिक पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है—देशभर में गरबा, डांडिया और रामलीला जैसे उत्सव समाज में उत्साह, एकता और सहयोग की भावना जगाते हैं। साथ ही, यह पर्व स्त्री-शक्ति के आदर और सम्मान का प्रतीक है, जो हमें याद दिलाता है कि नारी केवल स्नेह और ममता की मूर्ति नहीं, बल्कि संकटों का सामना करने वाली साहस और संकल्प की प्रतिमूर्ति भी है।

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अँधेरी रात में टिमटिमाते तारे, नदी किनारे अकेली नाव और दूर जलता एक दीपक, उम्मीद का प्रतीक।

सपने सिसक रहे हैं

‘सपने सिसक रहे हैं’ एक ऐसी भावपूर्ण कविता है, जो कठिन समय, टूटते सपनों और भीतर बची उम्मीद की लौ को शब्द देती है। यह कविता याद दिलाती है कि अँधेरी रात चाहे कितनी भी लंबी क्यों न हो, हर अस्त के बाद एक नया सवेरा अवश्य आता है।

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अक्षय कुमार का खुलासा, पत्नी ही हैं उनकी सबसे बड़ी आलोचक, फिल्म रिलीज पर करती हैं सख्त रिव्यू

ब्लॉकबस्टर हीरो की असली परीक्षा घर पर

व्हील ऑफ फॉर्च्यून के आगामी एपिसोड में अक्षय कुमार ने खुलासा किया कि उनकी पत्नी ही उनकी सबसे बड़ी आलोचक हैं. फिल्म रिलीज के बाद वह उनकी प्रतिक्रिया का बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि घर में उन्हें मिलता है सबसे सच्चा रिव्यू.

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प्रेम, स्वतंत्रता और अधूरे रिश्तों की एक गहरी कहानी

रुह का रिश्ता

कभी-कभी सच्चा प्रेम किसी को पा लेने में नहीं, बल्कि उसकी आत्मा को फिर से जीवित कर देने में छिपा होता है। राघव और रिद्धिमा की यह कहानी प्रेम, स्वतंत्रता और आत्मीयता के उसी गहरे एहसास को महसूस कराती है।

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डॉ. राधा मंगेशकर पुणे पर्यटन महोत्सव उद्घाटन समारोह में भाषण देती हुई, आसपास उपस्थित पदाधिकारी और दर्शक

सोलो ट्रैवल और आत्मविश्वास

पुणे में आयोजित तीन दिवसीय छठे पुणे पर्यटन महोत्सव में प्रसिद्ध गायिका और सोलो ट्रैवलर डॉ. राधा मंगेशकर ने उद्घाटन किया. उन्होंने बताया कि यात्रा न केवल मन को आनंद देती है बल्कि आत्मविश्वास और सहनशीलता को भी बढ़ाती है. महोत्सव में महाराष्ट्र और भारत के ऐतिहासिक, धार्मिक और ऑफबीट पर्यटन स्थलों की झलक देखने को मिली. लगभग 70 टूरिस्ट कंपनियों के स्टॉल्स लगे, और युवाओं, परिवारों और यात्रा प्रेमियों को जानकारी दी गई. डॉ. मंगेशकर ने सोलो ट्रैवल के महत्व और व्यक्तिगत विकास में इसके योगदान पर जोर दिया. यह महोत्सव पुणेकरों के लिए निशुल्क खुला है और आने वाले सप्ताहांत तक जारी रहेगा, जिसमें कैलास मानसरोवर यात्रा, जंगल पर्यटन मार्गदर्शन और कॉर्पोरेट ट्रैवल सत्र भी होंगे.

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