…खटकने लगोगे

डॉ. संजुला सिंह, संजू, प्रसिद्ध लेखिका, जमशेदपुर (झारखंड)

जब तक दूसरों को खुश
करने में लगे रहोगे तुम,
तब तक तो दूसरों के दिलों में
भरपूर जगह होगी तुम्हारी।
परंतु जिस दिन तुमने
अपनी खुशियों के बारे में सोचा,
अपने सपनों के बारे में सोचा
और उस डगर पर चलने लगे,
उसी दिन से तुम
सबकी नज़रों में खटकने लगोगे,
काँटे जैसे चुभने लगोगे।
फिर तुम्हारी कोई अहमियत
नहीं रह जाएगी
किसी की नज़रों में,
किसी के दिलों में।

जब तक तुम दूसरों की गलती
जानते हुए भी सिर झुकाते रहोगे,
तब तक ही तुम
दूसरों की नज़रों में सज्जन रहोगे।
परंतु जिस दिन तुमने
गलत के ख़िलाफ़
अपनी आवाज़ उठाई,
अपना सिर उठाया,
उसी दिन तुम
दूसरों की नज़रों में
चुभने लगोगे,
खटकने लगोगे।

जब तक तुम दूसरों की मर्ज़ी से
चलते रहोगे,
दूसरों के इशारों पर
बिना कोई सवाल किए
नाचते रहोगे,
तभी तक तुम
सीधा और सच्चा होने का
ख़िताब पाओगे।
परंतु जिस दिन तुमने
ये सब करने से
ख़ुद को रोक लिया
अर्थात् अपने जीवन-रूपी
कमान को अपने हाथ में
संभाल लिया
उसी दिन सब
तुमसे नफ़रत करने लग जाएँगे।
तुमसे ईर्ष्या, द्वेष,
जलन, तपन
यहाँ तक कि तुम्हें
हर तरह से बर्बाद करने पर
उतारू हो जाएँगे।

एक बात हमेशा याद रखें
अपने जीवन-रूपी कमान
कभी भी किसी और के
हाथ में न सौंपें,
वरना आप जीवन भर
रोएँगे, पछताएँगे।

क्योंकि यह दुनिया
और इस दुनिया के लोग
वैसे बिल्कुल भी नहीं हैं
जैसे दिखते हैं
और ख़ुद को दिखाते हैं।
उन्हें दूसरों की तकलीफ़ से
कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता;
वे सिर्फ़ अपना
स्वार्थ साधते हैं आपसे।
इसलिए वक़्त रहते
ख़ुद को संभाल लें।

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