विश्व पुस्तक मेले में उज्जैन की गूंज: ‘व्यंग्य के रंग’ में शामिल डॉ. हरीशकुमार सिंह

शहर को मिला साहित्यिक गौरव

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे

उज्जैन।
हिंदी व्यंग्य साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल के रूप में प्रकाशित ‘व्यंग्य के रंग’ नामक राष्ट्रीय स्तर के संकलन में उज्जैन के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. हरीशकुमार सिंह की रचना का चयन शहर के लिए गौरव का विषय बना है। इस प्रतिष्ठित पुस्तक का लोकार्पण एवं परिचर्चा विश्व पुस्तक मेला, भारत मंडपम, प्रगति मैदान, नई दिल्ली में संपन्न हुई।

देश-विदेश के 88 प्रतिष्ठित व्यंग्यकारों की श्रेष्ठ रचनाओं को समेटे इस संग्रह में डॉ. हरीशकुमार सिंह की व्यंग्य रचना ने पाठकों और साहित्यकारों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। उनकी लेखनी समाज की विसंगतियों, सत्ता के विरोधाभासों और आमजन की पीड़ा को गहरी संवेदना और तीखे व्यंग्य के साथ प्रस्तुत करती है।

डॉ. सिंह की विशेषता यह है कि उनका व्यंग्य केवल हँसाता नहीं, बल्कि सोचने और आत्ममंथन के लिए विवश करता है। उनकी रचना समकालीन सामाजिक यथार्थ पर पैनी दृष्टि डालते हुए नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं का सशक्त पक्ष रखती है। यही कारण है कि उन्हें हिंदी व्यंग्य के गंभीर और प्रतिबद्ध रचनाकारों में गिना जाता है।

उल्लेखनीय है कि यह संकलन प्रसिद्ध व्यंग्यकार एवं दिवंगत कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव जी को समर्पित है। पुस्तक का संपादन पवन कुमार जैन एवं परवेश जैन द्वारा किया गया है तथा इसका प्रकाशन अद्विक पब्लिकेशन ने किया है।

इस अवसर पर आयोजित परिचर्चा में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि व्यंग्य साहित्य केवल हास्य का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और व्यवस्था की विसंगतियों को उजागर करने का सबसे प्रभावशाली हथियार है। डॉ. हरीशकुमार सिंह की रचना को इसी सशक्त परंपरा का प्रतिनिधि बताया गया।

‘व्यंग्य के रंग’ न केवल एक पठनीय संग्रह है, बल्कि हिंदी व्यंग्य साहित्य का एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ भी बनकर उभरा है, जिसमें उज्जैन के डॉ. हरीशकुमार सिंह की सहभागिता शहर की साहित्यिक पहचान को राष्ट्रीय मंच पर मजबूती से स्थापित करती है।

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