गुरु पूर्णिमा पर ज्ञान का दीप जला, रिश्तों की लौ दमक उठी”

विद्यालय में आयोजित गुरु पूर्णिमा समारोह ज्ञान, श्रद्धा और समर्पण का अनुपम संगम बन गया। संस्कृत नाट्य प्रस्तुति, गीता श्लोकों का पाठ, ध्यान सत्र और गुरु पूजन जैसे आयोजनों ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊंचाई दी। मुख्य अतिथि एसडीएम श्री बृजेश सक्सेना एवं हार्टफुलनेस टीम की उपस्थिति ने इस अवसर को और भी गरिमामय बना दिया। विद्यार्थियों द्वारा अपने गुरुजनों को सम्मानित कर गुरु-शिष्य परंपरा का जीवंत चित्र प्रस्तुत किया गया।

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शशिकला पटेल को पीएच.डी. की उपाधि

मुंबई विश्वविद्यालय द्वारा शशिकला पटेल को समावेशी शिक्षा पर किए गए उत्कृष्ट शोध के लिए डॉक्टरेट (पीएच.डी.) की उपाधि प्रदान की गई है। उन्होंने यह शोध गोखले कॉलेज ऑफ एजुकेशन एंड रिसर्च, परेल में प्रो. (डॉ.) प्रशांत काले के मार्गदर्शन में पूर्ण किया। इस अवसर पर कई शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही, जिन्होंने उनके शोधकार्य में सहयोग और प्रेरणा प्रदान की।

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मुंबई में आयोजित हुआ ‘केवल काव्य परिवार’ का भव्य काव्य संध्या समारोह

चेन्नई से पधारे कवि-उद्योगपति केवल कोठारी के सम्मान में हुआ आयोजन नवी मुंबई, 14 जून साहित्यिक प्रेमियों के लिए शनिवार की शाम खास रही, जब सेक्टर-21, खारघर में आयोजित हुई एक भावपूर्ण और भव्य काव्य संध्या। यह आयोजन “केवल काव्य परिवार” के संस्थापक, चेन्नई से पधारे उद्योगपति व कवि श्री केवल कोठारी के मुंबई आगमन…

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प्रोफेसर अजहर हाशमी नहीं रहे

“हर विषय और हर शख्सियत पर जब वे लिखते हैं, तो पढ़ने वाला पढ़ता ही रह जाता है।”
यह पंक्ति प्रोफेसर हाशमी की अद्भुत लेखनी और ज्ञान की गहराई को दर्शाती है, जिससे पाठक मंत्रमुग्ध हो जाते थे।

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विरासत में मिली करुणा, कर्म में उतरी सेवा

“सेवा का भाव मेरे लिए कोई काम नहीं, जीवन का उद्देश्य है।”ये शब्द उस संवेदनशील समाजसेवी के हैं जिन्होंने कोरोना काल से लेकर आज तक मूक पशुओं, पक्षियों, जरूरतमंदों और असहायों के लिए अथक सेवा की है। चाहे पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था हो, गौशाला में चारे की सेवा या फिर बेड रिडन मरीजों के लिए निःशुल्क उपकरण हर कार्य में करुणा, प्रतिबद्धता और पारिवारिक संस्कारों की झलक मिलती है।

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गर्मियों में प्यासे परिंदों के लिए एक संजीवनी प्रयास

जैसे-जैसे तापमान बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे न केवल इंसान, बल्कि बेजुबान पक्षी भी पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं. ऐसे समय में कुछ समाज सेवकों द्वारा किया गया यह छोटा सा लेकिन अत्यंत संवेदनशील कार्य न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि मानवता की एक सुंदर मिसाल भी है.

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