जाते हुए साल को सलाम
जाते हुए साल को सलाम कहते हुए दिसंबर धीरे-धीरे विदा लेता है। कुछ रिश्ते साथ रह जाते हैं, कुछ यादों की किताब में दर्ज हो जाते हैं। समय की इस यात्रा में कुछ सपने पूरे होते हैं, कुछ अधूरे रह जाते हैं और उम्र चुपचाप अपने हिस्से का हिसाब घटाती चलती है। बूढ़ा दिसंबर खट्टी-मीठी स्मृतियाँ सौंपकर जाता है, ताकि जनवरी नई उम्मीदों की रोशनी बिखेर सके