आशियाना

A warm Indian family sitting together inside a cozy home in the evening, soft lighting, calm smiles, and a sense of love, belonging, and emotional comfort reflecting the true meaning of home.

वंशिका परसरामपुरिया, नवोदित लेखिका, मुंबई

हर घर बयाँ करता एक कहानी,
बयाँ करता एक रिश्ता,
कभी आधा-सा, तो कभी पूरा।

चलती हैं घरों में बातें,
कभी मीठी, तो कभी कड़वी,
कभी सच्ची, तो कभी झूठी।

आती है आवाज़ हँसी की, मुस्कुराहट की,
होते हैं झगड़े, होती है कड़वाहट,
मगर रहता है अपनापन,
रहता है सुकून।

न रह पाए लोगों के बिना,
न रह पाए परिवार के बिना।

हर दिन खींच लाए चेहरों की ओर,
खींच लाए सुकून की तरफ़,
उन लोगों की ओर,
जिनसे मिलती है हृदय को शांति।

नहीं बनता घर सिर्फ़ चार दीवारों से,
घर तो बनता है यादों से,
कसमों से, बीती रातों से।

वो घर ही क्या जहाँ अपना न हो,
वो अपने ही क्या जो परिवार न हो,
वो परिवार ही क्या जो जीने की वजह न हो।

हर घर बयाँ करता एक कहानी,
बयाँ करता एक प्रेम कहानी।

23 thoughts on “आशियाना

  1. सटीक वर्णन किया आपने 4 दीवारों से घर नहीं बनता।

  2. सही कहा बेटा ,परिवार ही तो सुकून है । साथ रहने की प्रेरणा देती बेहतरीन प्रस्तुति

  3. सही कहा बेटा ,परिवार ही तो सुकून है । साथ रहने की प्रेरणा देती बेहतरीन प्रस्तुति

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