
झरना माथुर, प्रसिद्ध लेखिका
ऐ अजनबी, है मजहबी।
नादान हूं,अंजान हूं।।
तू है जहाँ , मैं हूं वहाँ ।
अब तो बता,अपना पता।।
ओ सांवरे ,मन बाबरे।
ढूंढू यहां, से मैं वहां।।
चितचोर तू,मनमोर तू।
ये भावना, है साजना।।
ऋतु प्रीत की,मन मीत की।
आओ चले , आस्मां तले।।
उपवन खिले,दोनों मिले।
तूने लिया,मेरा जिया।।