
दिव्या सिंह, प्रसिद्ध लेखिका
टूटना हर चीज़ का बुरा होता है,
पेंसिल की नोक हो,
काँच का गिलास हो,
विश्वास हो, आस हो,
श्वास हो,
कोई ख़ास हो,
आकाश का तारा हो,
रिश्ता कोई प्यारा हो,
टूटना हर चीज़ का बुरा होता है।

दिव्या सिंह, प्रसिद्ध लेखिका
टूटना हर चीज़ का बुरा होता है,
पेंसिल की नोक हो,
काँच का गिलास हो,
विश्वास हो, आस हो,
श्वास हो,
कोई ख़ास हो,
आकाश का तारा हो,
रिश्ता कोई प्यारा हो,
टूटना हर चीज़ का बुरा होता है।
टुटना बुरा होता है बहोत खुब👌👌👌👌👌