-विज्ञान की सबसे कूल खोज, जो स्पर्श को नया अर्थ देती है

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज
अब तक हम सिर्फ सिक्स्थ सेंस के बारे में ही जानते थे जो अदृश्य रूप से हमें संभावित घटना के बारे में आगाह कर देती थी.. आप सिक्स्थ सेंस से कुछ ऐसा महसूस कर सकते थे जो दिखाई नहीं देता था. अब हम सेवन्थ सेंस से बिना छुए भी कुछ महसूस कर सकते हैं? अब तक यह एक साइ-फाइ फैंटेसी लगती थी, लेकिन ताज़ा रिसर्च कहती है,
शायद हाँ|क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑ़फ लंदन की टीम ने ऐसे प्रमाण दिए हैं कि मनुष्य रिमोट टच जैसी एक छिपी हुई क्षमता रखते हैं.
हाँ, आपने सही पढ़ा: एक ऐसी संवेदना जो हमारी उंगली की पहुंच से भी आगे महसूस कर सकती है|
70% सटीकता| बिना छुए| अविश्वसनीय, पर सच
प्रतिभागियों ने रेत में दबी छोटी वस्तुओं को बिना छुए ढूंढ लिया और वह भी तकरीबन 70% सटीकता के साथ| लगता है मानव शरीर उन दबाव-तरंगों को पकड़ लेता है जो ढीली सामग्रियोंरेत, मिट्टी, नमकके भीतर पैदा होती हैं| यानी हम उतने टच-डिपेंडेंट नहीं जितना अब तक मानते थे
विज्ञान का कूल एंगल
जब उंगली रेत के पास हलचल करती है, तो माइक्रो-प्रेशर वेव्स बनती हैं|ये इतनी सूक्ष्म होती हैं कि मॉडल्स कहते हैं .इनका पता लगना लगभग असंभव है| फिर भी इंसान इन्हें पकड़ लेते हैं| कुछ तट-परिंदों में भी यह सुपर-स्किल देखी गई है, जो गीली रेत के नीचे छुपे शिकार को बिल्कुल सही पकड़ लेते हैं| लगता है, इंसान भी उतने अनइवॉल्व्ड नहीं जितना हम सोचते थे|
….और रोबोट? पीछे रह गए.
रिसर्चर्स ने एक रोबोट को भी ट्रेन किया मशीन-लर्निंग,पूरा हाई-टेक सेटअप पर उसकी सटीकता बस 40% के आसपास अटकी रही|मानव मस्तिष्क बहुत हल्के, अस्पष्ट सिग्नलों को भी डीकोड करने में अभी भी मशीनों से कई कदम आगे है|
यह खोज कहाँ गेम-चेंजर साबित हो सकती है?
पुरातत्व: खुदाई से पहले ही नीचे छुपी चीजों का अंदाज़ा
फॉरेंसिक: बिना छुए सबूतों को स्कैन करने की क्षमता
स्पेस मिशन: मंगल/चंद्रमा की सतह के भीतर छिपी चीज़ें पहचानना
रोबोटिक्स: ह्यूमन-स्टाइल सेंसिंग वाली नई पीढ़ी की मशीनें
भविष्य के रोबोट शायद मिट्टी की नमी और बनावट के हिसाब से खुद का बिल्कुल प्राकृतिक जीवों की तरह री-कैलिब्रेट भी कर पाएँ
क्या यह शक्ति हमेशा से हमारे भीतर थी?
प्रकृति से कुछ संकेत मिले हैं जैसे मछलियाँ पानी के दबाव में बदलाव को पढ़ती हैं| कई स्तनधारी अपनी मूंछों से हवा के कंपन पकड़ते हैं|संभव है कि इंसानों में भी यह क्षमता कभी सक्रिय रही हो बस आधुनिक जीवन में सो गई हो|
अब आगे क्या होगा
साइंटिस्ट अब टेस्ट करेंगे
अलग-अलग दानेदार सामग्री,उंगली की गति,विभिन्न आकार की वस्तुएँ के बारे में तथा इस बात पर भी जोर दे सकते हैं कि ज्यादा स्मार्ट रोबोट मॉडल हो सकता है यह स्किल ट्रेनिंग से और बेहतर हो जिससे यह सर्जरी, बम-डिफ्यूज़ल, टेक्निकल रिपेयर और रेस्क्यू टीम्स के लिए बड़ी ताकत बन जाए.
धन्यवाद जानकारी साझा करने के लिए।