“हँसी, प्यार और टॉफी”

“अमर सिंह एडवोकेट”

बच्चे खाते प्यारी-प्यारी,
प्यारी टॉफी किस्मी बार।
प्यार-प्यार में शोर मचाते,
खाकर टॉफी किस्मी बार।

बच्चों को सबसे प्यारी थी,
लाल-गुलाबी किस्मी बार।
आठ आने में रोज़ खरीदो,
प्यारी टॉफी किस्मी बार।

नन्हा मुन्ना जब भी रूठे,
पापा लाते किस्मी बार।
हर चौराहे पर मिल जाती,
प्यारी टॉफी किस्मी बार।

मीठा खाने का मन चाहे,
घर में आई किस्मी बार।
जन्मदिन पर भरे गुब्बारे,
प्यारी टॉफी किस्मी बार।

कथा भागवत और प्रवचन,
प्रसादों में किस्मी बार।
सबसे सस्ती, सबसे अच्छी,
प्यारी टॉफी किस्मी बार।

दादी-दादा सबने खाई,
बहुत पुरानी किस्मी बार।
नाम पुकारे, मुंह में पानी,
प्यारी टॉफी किस्मी बार।

अंग्रेज़ी की बात निराली,
प्यार की बातें किस्मी बार।
किस का मतलब सबने समझा,
प्यारी टॉफी किस्मी बार।

हुए यार-दुश्मन जैसे वो,
हाथ में होती किस्मी बार।
बैर भुलाकर प्यार कराती,
प्यारी टॉफी किस्मी बार।

2 thoughts on ““हँसी, प्यार और टॉफी”

  1. बहुत ही खूबसूरत शब्दों में कविता का सृजन किया
    बहुत सुन्दर
    इतनी खूबसूरती शब्दों को पिरोने की सृजनता के लिए बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं ✍️🙏

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