बचपन से ही मैंने खेला था शिक्षक बनने का खेल,
आज समझ आता है उस खेल में छुपा था एक अमूल्य मेल।
शिक्षक बनना है प्रेम, समय और आनंद की कला,
हर शिष्य के लिए देना पड़ता है एक नया समझ का ताना बाना ।
जो शिष्य माँगे अधिक सहारा, उस पर देनी होती है विशेष दृष्टि,
बातों, समझाने और दृष्टांतों से खिलती है ज्ञान की सृष्टि।
सरल तरीके से सीख देना है शिक्षक की पहचान,
ये तो भगवान की दी हुई सबसे सुंदर दान।
गुरु का आशीर्वाद शब्द से बारे होता है,
जीवन भर का संग्रह, जो हमेशा साथ रहता है।
गुरु और शिष्य का रिश्ता है अमूल्य और पवित्र,
इसमें छुपा है घर जैसा सुकून, एक प्रेम का चित्र।
हर समस्या अपने गुरु से बाँट लो बिना संकोच,
उनकी मदद से मिलेगा तुम्हें हमेशा एक नयी रोशनी का सोच।
अंतिम पंक्तियाँ:
गुरु का आशीर्वाद जीवन का सबसे बड़ा धन है,
जो पाए, उसका जीवन हमेशा रौशन है।
धन्यवाद प्रभु जी, कि मुझे शिक्षक बनने का अवसर दिया,
इस दायित्व से मैंने अपने जीवन का अर्थ पाया।

सांद्रा लुटावन, प्रसिद्ध लेखिका , सूरीनाम (दक्षिण अमेरिका)
वाह सुन्दर रचना 👌👌
बहुत सुंदर अभिव्यक्ति