
प्रिया राय, भवंस त्रिपुरा विद्या मंदिर. त्रिपुरा
आज विदाई की यह बेला,
खड़ा हूँ आज यहाँ अकेला।
सोच रहा हूँ, क्या कहूँ,
शब्दों का कैसे चयन करूँ।
आँख भर आती है सोच उस दिन की,
कैसे पग बढ़े थे विद्यालय में मेरे पहले दिन की।
दोस्तों के साथ मिलकर क्लास में बंक मारना,
दूसरों का टिफ़िन चुराकर वहाँ से भाग जाना।
सबके साथ मिलकर टीचरों को तंग करना,
कहाँ होगी ऐसी बातें और दोस्तों से मुलाक़ातें।
हँसी-खुशी के वो सुनहरे पल,
याद रहेंगे जीवन के हर कल।
खेल के मैदान और प्रार्थना की ध्वनि,
सदा गूँजती रहेगी हमारे मन में ध्वनि।
कहते ही लब काँपते हैं, रूह के कण-कण,
आज मेरा विद्यालय में अंतिम है यह क्षण।
अध्यापक–अध्यापिका को शत-शत प्रणाम,
जहाँ भी जाएँगे, आएँगे आप ही के काम।
जीवन के हर पथ पर करेंगे रोशन अपने देश का नाम,
राहों में आई बाधाओं का सामना डटकर करेंगे हम।
चट्टान बनकर आगे चलने का मार्ग आपने ही दिखाया,
आने वाले समय में आदर्श बनकर आपके ही मार्ग अपनाएँगे।
यादें सँजोकर दिल में रखेंगे,
मित्रता के रिश्ते सदा निभाएँगे।
कल फिर नई मंज़िलें होंगी सामने,
पर इस आँगन को कभी न भूल पाएँगे।
आज विदाई की यह बेला,
मैं खड़ा हूँ आज यहाँ अकेला।