
डॉ. ऋषिका वर्मा, गढ़वाल उत्तराखंड
जब सब गलत कर रहे हो तो सही करना मुश्किल है।
अगर लड़ाई अपनो से हो तो जीतना मुश्किल है।
कभी कभी चलता है द्वंद अंतर्मन में,
हमेशा सत्य के राह पर चलना मुश्किल है।
लोग कहते तो है हमेशा अच्छा करो,
लेकिन अच्छे बने रहना उतना ही मुश्किल है।
दिखावा करना अलग बात है, लेकिन सच में अच्छा होना मुश्किल है।
जरूरी नहीं हम हमेशा ही सही हो,
मगर गलत को गलत और सही को सही कहना भी मुश्किल है।
चाहती तो मैं भी हूं कि सुकून से जिंदगी को जिऊ,
लेकिन जिंदगी में सुकून ही मिलना बहुत मुश्किल है।
चाहते तो सब है कि उनके साथ अच्छा हो,
लेकिन सबके साथ अच्छा कर सके ये भी करना मुश्किल है।
तोड़ देती है दम सच्चाई भी एक दिन जब कोई सुनता नहीं,
लेकिन उसी बात पर टीके रहना सच में मुश्किल है।
रावण को जलाते है दशहरा के दिन, ये तो रिवाज है समाज का,
लेकिन अपने अंदर के रावण को जलाना मुश्किल है।
बुराई तो हर मनुष्य के अंदर है हम सब जानते है,
इस बुराई को पहचान कर खत्म करना मुश्किल है।
न जाने को ढूंढ़ती हूं अपना कोई इस दुनिया की भीड़ में,
मुझे पता है इस स्वार्थी दुनिया में अच्छे लोगों का मिलना कितना मुश्किल है।