ख्यालों में आता रहा…

मेघा अग्रवाल, प्रसिद्ध लेखिका, नागपुर (महाराष्ट्र)

तस्वुर में वो मेरे आता रहा
रुलाता कभी, कभी सुलाता रहा (यादो मे)
कभी ज़ख्मों पर मलहम उसने लगाए
कभी आग दिल की भड़काता रहा।

सांसो में मेरे वह महकाता रहा
कभी बारिश बन बरसता रहा
जब मैंने खोले दरवाजे दिल के
तो धड़कन बन धड़कता रहा।

मोहब्बत कर क्यों नजरे चुराता रहा
देख कर मुझको यूँ अजनबी बनता रहा
आहट से उनकी हम तो जान जाते
न जाने क्यों वह अनंजान बनता रहा।

समय बड़ा बेरहम होता रहा
बिखरे दिलों को तोड़ता रहा
मेघा तू उनसे रुस्वाई न रख
ना जाने क्यों इश्क पर परदा रहा।

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