खामोश रात…

अर्चना अश्क मिश्रा , प्रसिद्ध साहित्यकार

यादों के दरिए पर,
जब तेरे आने की आहट होती है,
नींद बन जाती है प्रहरी और पलकों पर,
#खामोश_रात बनकर ठहर सी जाती है।

कुलबुलाती हैं रातें,
छटपटाता है मन,
परत दर परत जब खुलने लगती हैं
यादों का जखीरा।

जागती हुई बातें सोने नहीं देती,
मन अंतहीन यात्रा पर,
रहता है अक्सर
अनवरत एक इंतजार में।

न जाने कब हो जाए सवेरा,
मिट जाए ये तिमिर अंधेरा,
मिल जाए इस रुह को पुरसुकून,
बन जाए चिड़ियों की चहचहाहट सी ये खामोश रात।

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