खयालों की दहलीज पर…

रोहिणी पांडे, प्रसिद्ध लेखिका, नांदेड़

बड़े अदब से खड़े हैं अल्फाज़
खयालों की दहलीज पर
मौन से हारे हुए हुड़दंग
मचा रहे हैं भीतर ही भीतर

जज़्बातों से सराबोर
अल्फाज़ मचल तो रहे हैं
पर तमीज़ ने रोक रखा है उन्हें
यूं सरेआम बाहर आने से

इसलिए बेचारे सहम गए हैं
किसी नकाबपोश
औरत की तरह

अब के ढूंढ लिया है
उन्होंने एक जरिया
अपने अभिव्यक्ति का
इसीलिए तो…
आजकल उनकी आंखें भी
बोलने लगी हैं
वो भी…
अल्फाज़ों के परे

2 thoughts on “खयालों की दहलीज पर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *