महिदपुर रोड का पहला जलसा: चटर्जी नाइट

सुरेश परिहार, एडीटर, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे

साल 1980 का महिदपुर रोड. गलियों में हलचल थी, लेकिन इस हलचल में कुछ खास बात थी. महिदपुर रोड के लोगों और विद्यार्थियों के बीच पहला बड़ा जलसा होने वाला था चटर्जी नाइट. यह जलसा किसी आम कार्यक्रम के लिए नहीं, बल्कि उन दिनों लोकप्रिय शिक्षक स्व. कपूर साहब की स्मृति में आयोजित किया गया था.
कपूर साहब महिदपुर रोड के हाई स्कूल में सामाजिक अध्ययन और इतिहास पढ़ाते थे. शराब के शौक़ीन थे, पर विद्यार्थियों के प्रति उनका स्नेह और उदारता अद्भुत थी. कम समय में ही वे विद्यार्थियों के बीच लोकप्रिय हो गए थे. लेकिन उनकी अचानक असमायिक मृत्यु ने सभी को झकझोर दिया. इस दर्द को कुछ हद तक कम करने के लिए उनके सम्मान में यह जलसा रखा गया.
मुख्य आकर्षण थे प्रभात चटर्जी और उनका आर्केस्ट्रा ग्रुप. इंदौर में उन्हें सेलिब्रिटी का दर्जा मिला हुआ था. तीन दशक से ज्यादा समय तक उन्होंने शहर और आसपास कई प्रस्तुतियाँ दी थीं. अब उनकी प्रस्तुति महिदपुर रोड में होनी थी.
लेकिन समस्या थी मंच की कमी. मिडिल स्कूल के मैदान में ऐसे बड़े कार्यक्रम के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी. विद्यार्थियों ने हार नहीं मानी. उन्होंने खाली घासलेट के ड्रम इकट्ठे किए और उनके ऊपर रेलवे के लकड़ी के स्लीपर रखकर मंच तैयार किया. यह मंच साधारण था, लेकिन दृढ़ संकल्प और मेहनत की छाप इसमें साफ झलक रही थी.
जैसे ही प्रभात चटर्जी मंच पर आए, तालियाँ गूँज उठीं. वाह! क्या प्रस्तुति है! कोई बोला. लगता है जैसे रिकॉर्ड बज रहा हो! किसी ने कहा. कलाकारों ने अपने गीतों और धुन से ऐसा जादू किया कि लोग मंत्रमुग्ध हो गए. उनकी आवाज़ और संगीत में इतनी ताकत थी कि हर कोई वहीं खो गया.
मंच पर बैठकर मैंने देखा कि विद्यार्थियों की आँखों में चमक, उनके पसीने में मेहनत की खुशबू, और हर ताल पर तालियाँ. यह केवल एक संगीत कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक श्रद्धांजलि और प्यार की मिसाल था. पूरे महिदपुर रोड में उस रात सिर्फ संगीत की धुन और स्मृति की खुशबू थी.यह जलसा साबित कर गया कि जब जुनून और समर्पण साथ हों, तो सीमित संसाधन भी बड़ी उपलब्धि में बदल सकते हैं. महिदपुर रोड का पहला जलसा, चटर्जी नाइट, इतिहास बन गया. यह यादें आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं संगीत, समर्पण और सच्ची श्रद्धा की एक अमिट कहानी.

13 thoughts on “महिदपुर रोड का पहला जलसा: चटर्जी नाइट

  1. गणेशोत्सव के दस दिनी जलसे में इंदौर में भी खूब धूम रहती थी चटर्जी आर्केस्ट्रा की । 🌹

    1. आदरणीय सर, आपकी टिप्पणी अन्य रचनाकारों के लिए भी उपयोगी है, क्योंकि आपकी टिप्पणी बेबाक होती है, बिना लागलपेट के.

    2. इसके बारे मे पहली बार पढ़ा है… इससे पहले इस विषय मे सुना भी नहीं..हमारा तो जन्म हीं 1980 का है 👌🏼👌🏼🚩बहुत खूब..

      1. इसलिए संजय भाई जब भी टाइम मिले, गांव के बड़े-बुजुर्गों के साथ बैठो, उनसे बातें करो, दूर हो तो फोन पर बात करो, उनके कॉल और वीडियो रिकॉर्ड करो बाद में यही सब याद आते हैं, बहुत कुछ कहना सुनना रहता है उनको, कुछ अपनी सुनाओ, कुछ उनकी सुनो… बाकी तो दुनिया जैसी चलनी है वैसे चलेगी…

  2. उस समय मैं बहुत छोटा था,लेकिन कुछ कुछ याद है। उस समय प्रेम रोग फिल्म के गीत बहुत हिट थे,जिसे हू बहु चटर्जी आर्केस्ट्रा के कलाकारों ने विथ म्यूजिक परफॉर्म किया था, बैक साइड में रंगीन मल्टीकलर लाइट घूमती हुई ,परदे पर दिखाई देती थी।

    1. चटर्जी की प्रस्तुतियां इतनी जबर्दस्त थी कि कई लोग चौराहे पर बात करते रहे कि इंदौर वाले रिकॉर्ड बजाकर बेवकूफ बना गए लेकिन यह पूरी तरह गलत था.. चटर्जी ब्रदर्स उस जमाने के बहुत ही उम्दा कलाकार थे.

  3. मुझे कुछ -कुछ याद है। उस समय में सिर्फ 5/6 वर्ष का था। दीदी ने बताया था, में घुम गया था। क्यों वास्तव में उस उम्र में सिर्फ मस्ती, दौड़ना ओर लाइटिंग में,थे जैसे उत्सव हो। कोई।।। कहीं भी रहें, महिदपुर रोड़ दिल में बसता है।। मुझे गर्व है में मिनी भारत में रहा।

  4. मुझे कुछ -कुछ याद है। उस समय में सिर्फ 5/6 वर्ष का था। दीदी ने बताया था, में घुम गया था। क्यों की वास्तव में उस उम्र में सिर्फ मस्ती, दौड़ना ओर लाइटिंग में, जैसे उत्सव हो। कोई।।। कहीं भी रहें, महिदपुर रोड़ दिल में बसता है।। मुझे गर्व है में मिनी भारत में रहा।

  5. आदरणीय भाई साहब नमस्ते
    हमे तो याद नहीं पर अपने म. रोड के पुराने इतिहास को याद दिलाया इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद
    आप गांव से इतनी दूर हो कर भी गांव को याद करते हो आपके गांव के प्रति प्रेम झलकता है

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