
उज्जैन से डॉ. हरीशकुमार सिंह की रिपोर्ट
उज्जैन।
सरदार वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्र भारत को एक सूत्र में पिरोने का ऐतिहासिक कार्य किया। सैकड़ों रियासतों का एकीकरण कर उन्होंने अखंड भारत की मजबूत नींव रखी, जिसके कारण आज भारत एक सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित है। ये विचार भारत भारती और सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विचार कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भारत भारती के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री विनय पत्राले ने व्यक्त किए।
कार्यक्रम का आयोजन वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने तथा सरदार वल्लभभाई पटेल के शार्घ शताब्दी वर्ष के अवसर पर विश्वविद्यालय के शलाका दीर्घा सभागृह में किया गया। श्री पत्राले ने कहा कि आनंदमठ से जन्मा राष्ट्रगीत वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का स्वर है। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि वंदे मातरम् का सामूहिक गायन राष्ट्रीय चेतना, एकता और देशप्रेम की भावना को और अधिक सुदृढ़ करता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु डॉ. अर्पण भारद्वाज ने सरदार पटेल के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत का एकीकरण अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण कार्य था, जिसे सरदार पटेल ने अपने दृढ़ संकल्प, दूरदर्शिता और राष्ट्रनिष्ठा से सफल बनाया। आज का एकीकृत भारत उनके सशक्त नेतृत्व का प्रतिफल है।
विशेष अतिथि प्रो. दिवाकर नातू ने कहा कि ऐसे कार्य करने चाहिए जिससे समाज आपको सम्मान की दृष्टि से देखे। एक अच्छे इंसान के रूप में जीना ही समाज और राष्ट्र के हित में होता है। भारत भारती के राष्ट्रीय संयोजक श्री दत्तात्रय सालुंके ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
स्वागत भाषण कार्यक्रम संयोजक डॉ. प्रवीणा दवेसर ने दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता और माता सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन से हुआ। भारत भारती वंदना का सुमधुर गायन सूरज नागर ने किया। वंदे मातरम् गीत का गायन भाग्यश्री ने तथा भारत माता की आरती का गायन अर्चना तिवारी ने किया।
अतिथियों का स्वागत प्रो. हरिमोहन बुधौलिया, डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा, डॉ. हरीशकुमार सिंह, सुश्री अदिति दवे, डॉ. शैलेन्द्र पांडे, डॉ. पाँखुरी वक्त सहित अन्य ने किया। कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा, प्रो. नागेश्वर राव, डॉ. उमेशकुमार सिंह, प्रो. राकेश डांड, प्रो. शैलेन्द्र पाराशर, प्रेमचंद सृजन पीठ के निदेशक मुकेश जोशी, डॉ. तपस्या ठाकुर, डॉ. उर्मि शर्मा सहित बड़ी संख्या में सुधिजन उपस्थित रहे।
अतिथियों को स्मृति-चिन्ह कुलगुरु डॉ. अर्पण भारद्वाज एवं डॉ. प्रवीणा दवेसर द्वारा भेंट किए गए। कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पाँखुरी वक्त ने किया एवं आभार प्रदर्शन डॉ. विश्वजीत परमार ने किया।