पहली बात… जो हर पल आती है याद…

पहली यादों और भावनाओं को दर्शाता भावुक दृश्य

विजया डालमिया, प्रसिद्ध लेखिका, हैदराबाद

पहली बारिश…मैं और तुम…
पहले प्यार की पहली चिट्ठी…
वो पहला प्यार, पहला इज़हार, पहला इकरार, पहली मुलाक़ात..भला कौन भूल सकता है?

जब कभी वे लम्हे याद आ जाते हैं, दिल को गुदगुदा जाते हैं। कुछ बातें भुलाए नहीं भूलतीं..ख़ासकर पहली बार वाली।

फिर चाहे वह आपके बच्चे के स्कूल का पहला दिन हो या आपके कॉलेज का पहला दिन। बच्चे का उठाया पहला कदम हो या आपके कार्यक्षेत्र में उठाया गया पहला कदम। आपकी पहली सफलता हो या बच्चे का पहला रिज़ल्ट। आपकी पहली कविता हो या बच्चे का लिखा पहला शब्द। ससुराल में बनाई पहली रसोई हो या पहली चाय..हर वह ख़ुशी जो पहली बार मिलती है, अविस्मरणीय होती है।

जब-जब ये यादें आती हैं, बीते लम्हों की ख़ुशी से आज के पल भी महक उठते हैं..मानो कल ही की तो बात हो।

शादी की पहली रात शायद ही कोई भूला पाता है। विदाई के समय माँ की आँखों में लरजते आँसू और लौटकर आने पर उसके चेहरे पर खिली ख़ुशी यह भी हम कभी नहीं भुला पाते। प्लेन का पहला सफ़र हो या बच्चों के साथ किया गया ट्रेन का पहला सफ़र। दोस्तों के साथ मनाई गई पहली पिकनिक हो या दोस्तों के साथ खेली गई पहली होली ये सब ख़ुशी के ऐसे एहसास हैं, जो चेहरे पर तो नज़र आते हैं, पर शब्दों में उतने बयान नहीं हो पाते।

उसी तरह, पहली बार जब दिल टूटता है—वह अनुभूति भी शब्दों में नहीं बताई जा सकती। ख़ुशी और दुख दिखने में विरोधाभास हैं, पर चलते साथ-साथ हैं; और दोनों की ही अनुभूति हम सिर्फ़ महसूस कर सकते हैं..बता नहीं सकते।

हर वह पहला अनुभव…चाहे अच्छा हो या बुरा…हमेशा याद रहता है।

दिल आम नहीं करता एहसास की खुशबू को,
रूह में बसा के रखता है पहली-पहली यादों को।

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