अंतरराष्ट्रीय संग्रहालयों के स्तर की है शिवसृष्टि की भव्यता

प्रसिद्ध अभिनेता प्रवीण तरडे ने पुणे की शिवसृष्टि का दौरा करते हुए कहा कि इसकी भव्यता और जीवंतता अंतरराष्ट्रीय संग्रहालयों के स्तर की है। उन्होंने शिवसृष्टि को छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वराज्य, स्वधर्म और स्वभाषा का सजीव अनुभव बताते हुए सभी मराठी नागरिकों से इसे देखने की अपील की।

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काश के फूल

डॉ. मंजूलता, प्रसिद्ध साहित्यकार, नोएडा काश! मैं फूल होती काश कातुम्हारे मानस-पटल परपड़ी स्याह परतों परअपने नर्म-नर्म फूलों सेरुई के फाहे-सा ढक देती। ख़्वाहिशें जो तुम्हारीदबी-दबी-सी हैं, उन्हें काश के फूलों केउड़ते-हिलते फाहों सेसजा देती। बिखरते तो ख़्वाहिशों की तरहकाश के फूल भी,पर शरद ऋतु आतेकहाँ रोक पाते खिलनेसे ख़ुद को! तेरे मन में भी…

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मैं हिंदी बोल रही हूँ

हिंदी ने वर्षों से भारतीय संस्कृति, साहित्य और जनजीवन में गहरी जड़ें जमा रखी हैं। यह अपने देश में राजभाषा के रूप में पूर्ण सम्मान की आकांक्षा रखती है। विदेशी विश्वविद्यालयों और विश्व हिंदी सम्मेलनों में इसका सम्मान है, मगर अपने देश में इसे संवैधानिक रूप से राष्ट्रभाषा घोषित नहीं किया गया। यह पाठ हिंदी के गौरव, संघर्ष और उसके महत्व को बखूबी उजागर करता है।

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5 और ट्रेनों में तत्काल टिकट के लिए लगेगा ओटीपी

भारतीय रेलवे तत्काल टिकट बुकिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से नया ओटीपी
आधारित प्रमाणीकरण सिस्टम लागू कर रही है. इसी क्रम में सेंट्रल रेलवे की ५ और ट्रेनों में यह नई व्यवस्था १९ दिसंबर २०२५ से लागू की जा रही है.भारतीय रेलवे तत्काल टिकट बुकिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से नया ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण सिस्टम लागू कर रही है.

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1 रुपये की टिकट, हज़ारों यादें..

महिदपुर रोड के टंकी चौराहे पर, नाटक कंपनी की रौनक हर साल एक अलग ही दुनिया बुनती थी। 1 रुपये की टिकट पर रात का एक शो जहाँ नाटक के बीच में डांसर अपनी नृत्य कला से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती। दर्शक नोट ऊपर उठाकर सम्मान देते, डांसर की नज़रें जैसे जवाब देतीं, और कोई कलाकार तुरंत नोट उठाकर ले जाता। यह सिर्फ मनोरंजन नहीं था, यह उस ज़माने की मासूमियत, उत्साह और जीवंत संस्कृति का हिस्सा था

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रिज़ोर की अंतिम रानी श्रीमती शशि सिंह की स्मृति में श्रद्धांजलि

रिज़ोर की अंतिम रानी

उत्तर प्रदेश के एटा जिले की ऐतिहासिक रिज़ोर रियासत की अंतिम रानी श्रीमती शशि सिंह अपने विद्वत्ता, समाजसेवा और उदार व्यक्तित्व के लिए जानी जाती थीं. सोलहवीं पुण्यतिथि पर उन्हें परिवार और लाइव वायर न्यूज़ की ओर से यह भावभीनी श्रद्धांजलि समर्पित है, जो बुजुर्गों के संस्कार, दादी के महत्व और विरासत में मिले मूल्यों को याद करती है.

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प्रेम से पीड़ा तक: नारी की संवेदना की सच्चाई

“स्त्री जब प्रेम में छल खाती है या विवाह में अपमान सहती है, तब उसकी संवेदना टूटी हुई कांच की तरह बिखर जाती है। ममता और त्याग की प्रतिमूर्ति होकर भी वह अधूरी कहानी लिखने पर विवश होती है। कभी अपने बच्चों की गलत परवरिश का दोष भी उसी पर आता है, तो कभी परिवार के विघटन का बोझ भी उसके कंधों पर डाल दिया जाता है। यदि नारी नफ़रतों के बीज बोना छोड़ दे और पुरुष अन्याय पर अपनी सहमति न दे, तभी प्रेम का प्रकाश फैलेगा और समाज में करुणा का पुनर्जन्म होगा। जिस दिन प्रेम हर हृदय में विस्तारित होगा, उस दिन नारी सचमुच लक्ष्मी स्वरूपा बनकर पूजी जाएगी।

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सोना-चांदी ने बनाया नया इतिहास

सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज यानी 29 दिसंबर को लगातार पांचवें कारोबारी दिन दोनों कीमती धातुएं अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक 24 कैरेट सोने की कीमत 205 रुपये की बढ़त के साथ 1,38,161 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई, जो अब तक का उच्चतम स्तर है। इससे पहले सोने का भाव 1,37,956 रुपये प्रति 10 ग्राम था।

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ये कैसा दिवस?

हर वर्ष हम माता-पिता दिवस मनाते हैं, हिंदी दिवस मनाते हैं, और इसी तरह कई अन्य दिवस भी मनाते हैं। इन्हीं में एक दिन हम कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद का जन्म दिवस भी मना लेते हैं। फिर सब कुछ समाप्त। क्या एक दिन का स्मरण उनके सम्मान के लिए पर्याप्त है? हम कभी यह सोच भी नहीं पाते कि जिस तरह बंगाल ने रवींद्रनाथ टैगोर के गीत, संगीत, कला और साहित्य को न केवल सहेज कर रखा है, बल्कि उसे अपनी जीवनशैली में आत्मसात किया है — उसी तरह हमें भी अपने साहित्यकारों को सम्मान देना चाहिए। बंगाल का समाज अपने बच्चों को, आधुनिक होते परिवेश में भी, रवींद्रनाथ के प्रति सम्मान भाव से परिचित कराता है। समय-समय पर उनके सम्मान में आयोजन होते हैं।

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…जब एक अफवाह ने हिला दिया था महू को

27 साल पहले महू के सात रास्ता स्कूल में एक टाइम बम मिलने की सूचना से हड़कंप मच गया था। संसाधनों की कमी और अफरा-तफरी के बीच प्रशासन, पुलिस और बम निरोधक दस्ते ने जिस सूझबूझ से हालात को संभाला, वह आज भी यादगार बन गया है। घटना से जुड़े तत्कालीन अधिकारी आज भी इसे याद करते हैं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

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