अप्रैल में ही भीषण गर्मी का प्रकोप, पारा 43 डिग्री पार
उज्जैन में भीषण गर्मी का प्रकोप, तापमान 43 डिग्री पार. प्रशासन ने 1 से 8वीं तक के स्कूल बंद किए, 9–12वीं का समय बदला. जानिए पूरी खबर.

उज्जैन में भीषण गर्मी का प्रकोप, तापमान 43 डिग्री पार. प्रशासन ने 1 से 8वीं तक के स्कूल बंद किए, 9–12वीं का समय बदला. जानिए पूरी खबर.
अहिल्या की प्रतीक्षा के रूपक में लिखी यह कविता एक स्त्री के भीतर के पत्थर हो चुके दर्द और अधूरी चाहत की सजीव अभिव्यक्ति है।
किसानों की जाती है निःशुल्क खाद वितरित श्रीमंत दगडूसेठ गणपति के चरणों में श्रद्धापूर्वक अर्पित फूल, मालाओं और नारियल से बना निर्माल्य अब किसानों के जीवन में खुशियां बिखेर रहा है. पिछले नौ वर्षों से, रोटरी क्लब ऑफ पुणे युवा इस निर्माल्य को एक नया अर्थ दे रहा है. गणेशोत्सव भक्ति, आस्था और उत्साह का…
बच्चों की मेहनत, प्रतिभा और सफलता जब गुरु के आशीष से जुड़ती है, तो हर उपलब्धि खास बन जाती है। सिद्धि के गीत, वैष्णवी का अभिनय, कियरा का नृत्य और आराध्या की चित्रकला को समर्पित यह कविता बच्चों के सपनों और उनकी जीत का उत्सव है।
कभी-कभी हमें भ्रम हो जाता है कि सामने वाला सच में प्यार करता है उसकी बातों में अपनापन दिखता है, इकरार के लम्हे भी सच्चे लगते हैं। वह गले लगकर समझने का दावा तो करता है, पर दुनिया के सामने वही समझ कमज़ोर पड़ जाती है और हमारी नासमझी गिनाई जाती है। मन जैसा चाहे वैसा प्यार दे भी दे, और इल्ज़ामों की बरसात भी उसी मन से कर दे तब रिश्ते बोझ बनते देर नहीं लगती।
वक्त लौटकर आता हुआ दिखाई देता है, लेकिन उसके साथ बिछड़े लोग और बीते पल कभी वापस नहीं आते। ‘वक्त का पहिया’ समय, स्मृतियों और जीवन में आए बदलावों पर आधारित एक गहरी और भावुक हिंदी कविता है, जो पाठक को अपने अतीत से रूबरू कराती है।
तुमने मित्रता का हाथ बढ़ाया और मैंने उसे सच्चे मन से स्वीकार भी किया। यह अनुभव मुझे एक नई ख दे गया – कि हर नए मित्र को परखकर ही अपनाना चाहिए। तुम्हें यह भ्रम रहा कि तुम्हारी मित्रता मुझे जीवन भर अभिमान देगी, लेकिन धीरे-धीरे मैं समझने लगी कि मित्रता में स्वार्थ छिपा होता है और उसका सत्य अक्सर कटु होता है।
तुम्हारी खट्टी-मीठी बातें, दिखावे की आवभगत और गरिमामयी उपस्थिति मुझे किसी बगुला भगत से कम नहीं लगी। मेरी बेरंग जिंदगी में रंग भरने की तुम्हारी कोशिश झूठी थी, और प्रेम प्रसंगों की ठिठोली मेरी आस्था को भीतर ही भीतर जला रही थी। तुम्हारी झूठी तारीफें, बनावटी शानोशौकत और ऊँची-ऊँची बातें मेरी अस्मिता पर आघात कर रही थीं। मेरे कंधे तुम्हारे सपनों का बोझ ढोते रहे, और तुम्हारी प्रसिद्धि की लालसा मेरी आहुति को प्रश्नांकित करती रही। तब मैंने जाना कि तुम्हारी मित्रता सच में कफन जैसी सफेद और मौत जैसी ठंडी है।
नौवीं कक्षा से शुरू हुई रीता दास राम की साहित्यिक यात्रा कविता, कहानी, उपन्यास और संपादन तक फैली है। इस साक्षात्कार में उन्होंने साहित्य की सामाजिक जिम्मेदारी, स्त्री-अनुभवों और बदलते समय की चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए हैं।
मीनाक्षी वर्मा, लेखिका, नई दिल्ली बहुत पुराने वक्त की बात है। सीताराम नाम का एक आदमी झोपड़ी में रहता था और मजदूरी किया करता था। एक बार मजदूरी करते वक्त उसने एक आदमी को रश्मि कम्बल बेचते देखा। कम्बल देखकर उसका उसे खरीदने का मन हुआ, लेकिन उसके पास पैसे नहीं थे।वह घर आकर भी…
इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में पुरुषोत्तम अग्रवाल की पुस्तक ‘मजबूती का नाम महात्मा गांधी’ का लोकार्पण हुआ। अशोक वाजपेयी ने इसे गांधी-निंदा अभियानों को चुनौती बताया, वहीं राजमोहन गांधी ने देश में फैलाए जा रहे झूठों पर चिंता जताई।