सराफा चौपाटी के खिलाफ व्यापारी एकजुट

एक सितंबर से एक भी दुकान नहीं लगने देंगे, अन्यत्र शिफ्ट करें दस दिन बाद बड़ा-छोटा सराफा में चौपाटी लग पाएगी या नहीं इसे लेकर रस्साकशी की स्थिति बनना तय है। भाजपा को भी राजनीति करना है, पेंच यह भी फंस रहा है कि सराफा क्षेत्र विधानसभा क्षेत्र क्रमांक चार का हिस्सा है और भाजपा…

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धरती माँ के प्रतीकात्मक स्वरूप के साथ वृक्षों की कटाई, सूखती नदियों और पिघलते ग्लेशियरों को दर्शाता पर्यावरण संरक्षण का यथार्थवादी दृश्य।

प्रकृति की चेतावनी

“प्रकृति की चेतावनी” धरती माँ की ओर से मानवता को दिया गया एक मार्मिक संदेश है। कविता में वृक्षों की कटाई, नदियों की दुर्दशा, पिघलते ग्लेशियर और पर्यावरण संकट की गंभीरता को उजागर किया गया है। यह रचना मनुष्य को चेताती है कि यदि समय रहते प्रकृति का संरक्षण नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

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बचपन की स्लेट, मासूमियत की तालीम

एक पेम में पानी पोतकर स्लेट पर अक्षर उकेरना यही तो हमारा पहला विद्यालय था। उंगलियों की पकड़, बाबूजी की बनाई लकीरों पर चलना, स्लेट का टूटना और फिर भी सीखने का हौसला… सब याद है। आज बच्चे टचस्क्रीन पर लिखते हैं, मगर हमें अक्षर पेम की खुरदरी चुभन से मिले थे। पानी पोतने से अक्षर मिटते थे, पर बचपन के सबक मन में उतनी गहराई से छप जाते थे कि आज भी स्मृतियों की स्लेट पर चमकते हैं। सच कहें तो हमने सिर्फ अ-आ नहीं सीखा था, हमने जीवन सीखा था।

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हर जन्म की प्यास

मीठी नदी के आत्मस्वर में कही गई एक भावपूर्ण यात्रा है. जहाँ स्वप्नों की मिठास लेकर वह उदधि से मिलन को निकल पड़ती है। खारापन स्वीकार्य है, क्योंकि हर जन्म की प्यास वहीं शान्त होती है। वर्षों की भटकन, नयनों में भरा जल, और नमन से भरा समर्पण सब मिलकर प्रेम, प्रतीक्षा और स्वीकार की एक शान्त, उजली कथा रचते हैं।

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इंसानियत…

मुंबई बाढ़ का वो दिन मेरे लिए हमेशा के लिए यादगार बन गया. दोपहर बारह बजे से शाम पांच बजे तक मैं कुर्ला और सायन के बीच फँसी रही, फिर भी घर पहुँचने के कोई आसार नज़र नहीं आ रहे थे.
ट्रेन में बैठते ही लगा कि यह तो आम बरसात है, क्योंकि ट्रेन सामान्य गति से चल रही थी. लेकिन विद्याविहार के बाद जैसे ही ट्रेन रुकी, परेशानियाँ शुरू हो गईं. कुर्ला पहुँचने में आधा घंटा लग गया और वहाँ से थोड़ी देर चलकर ट्रेन फिर आऊटर पर रुक गई और बस वहीं अटक गई.
घड़ी के काँटे घूमते रहे, एक… दो… तीन… चार… पाँच बज गए. बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी.
कंपार्टमेंट में पहले तो सब सामान्य थे, किसी को अंदाज़ा नहीं था कि परेशानी इतनी लंबी खिंच सकती है. धीरे-धीरे लोगों ने घर और ऑफिस में खबर दे दी कि ट्रेन में फँसे हैं, देर हो सकती है.

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इंदौर-कोटा एक्सप्रेस 4 मई तक रद्द, सोगरिया से होगी वापसी

कोटा तक नहीं जाएगी इंदौर-कोटा एक्सप्रेस

कोटा रेलवे स्टेशन पर चल रहे निर्माण कार्य के कारण ट्रेनों की आवाजाही पर असर पड़ना शुरू हो गया है। प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर काम जारी होने के चलते रतलाम मंडल से संचालित इंदौर-कोटा एक्सप्रेस अब 4 मई तक कोटा स्टेशन तक नहीं पहुंचेगी। यह ट्रेन सोगरिया स्टेशन तक ही जाकर वहीं से वापस लौटेगी।

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समय की तरह पुरुष…

औरतें अपने पुरुषों के समय का बहुत ख्याल रखती हैं। लेकिन अगर सच में ख्याल रखना है, तो जरा ‘समय’ नामक पुरुष का पीछा करके देखो—आखिर यह समय कहाँ जा रहा है? क्या तुम इसे रोक पाओगी, अपनी जुल्फों में, या कोमल त्वचा पर, या आंखों की चमक और घुटनों की ताकत पर? नहीं, रोक नहीं पाओगी।तो फिर क्यों उलझती हो पुरुष के साथ? समय की तरह ही पुरुष भी है—तेरा है तो रहेगा, नहीं है तो चला जाएगा।

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सूर्योदय की सुनहरी रोशनी में एक भारतीय माँ अपने वयस्क बच्चे के सिर पर स्नेहपूर्वक हाथ रखे खड़ी है। दोनों के चेहरे पर प्रेम, सम्मान और आत्मीयता झलक रही है। पृष्ठभूमि में हरे-भरे खेत, खिले हुए फूल और शांत आकाश दिखाई दे रहे हैं, जो मातृत्व, त्याग, संरक्षण और जीवन की प्रेरणा का प्रतीक हैं।

ममता सागर

माँ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, प्रेरणा और समर्पण का जीवंत स्वरूप है। यह भावपूर्ण कविता ईश्वर के सबसे अनमोल उपहार “माँ” के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करती है।

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बदलता भारत

भारत आज तेजी से बदल रहा है। यह नवयुग की पहचान अपने भीतर समेटे, नवोन्मेष के पंख फैलाए हर सपना साकार करने की दिशा में बढ़ रहा है। गाँवों तक इंटरनेट पहुँच चुका है, खेतों में आधुनिक मशीनें उतर आई हैं। बच्चों की आँखों में अब नई दुनिया के सपने झिलमिलाते हैं और ज्ञान की धाराएँ पहले से कहीं अधिक सहजता से बह रही हैं।

जहाँ कभी चूल्हों के धुएँ से घर-आँगन भर जाया करते थे, वहाँ अब हर रसोई गैस की लौ से जगमगा रही है। किसान मौसम का हाल मोबाइल ऐप से जानते हैं और डिजिटल मंडी से अपने परिश्रम का उचित मूल्य पा रहे हैं।

शहरों में मेट्रो की गति-सी तेज़ सोच ने जन्म लिया है। स्टार्टअप्स एक नए उद्यमशील भारत की तस्वीर गढ़ रहे हैं। बेटियाँ अब चाँद तक पहुँच रही हैं और सीमा की रक्षा में भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं। उनमें अब डर या बंधन नहीं, बल्कि हर मंज़िल हासिल करने का जज्बा है।

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परीक्षा परिणाम के बाद चिंतित विद्यार्थी को हौसला देते माता-पिता, आशा और सकारात्मक सोच का प्रेरणादायक दृश्य

कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

जीवन में असफलता अंत नहीं होती। हर कठिन दौर के बाद नई शुरुआत का अवसर मिलता है। यह लेख बच्चों को धैर्य, परिश्रम और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने तथा जीवन को सकारात्मक दृष्टि से देखने की प्रेरणा देता है।

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