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हिंदी है मेरी पहचान 

हिन्दी हमारी मातृभाषा है, हमारे अस्तित्व का पहला परिचय और हमारी पहचान का अभिन्न हिस्सा। मुख से निकला पहला शब्द “मां” हिन्दी का ही रूप है, जिसकी मधुरता कानों में ऐसे घुलती है जैसे मिस्री का स्वाद। इस पर गर्व करना स्वाभाविक है कि हिन्दी हमें मातृभाषा के रूप में मिली है।लेकिन दुख की बात यह है कि आज यही भाषा उपेक्षित सी हो गई है। आधुनिकता की आड़ में युवा पीढ़ी अंग्रेज़ी बोलने को शान मानती है और हिन्दी बोलने में संकोच या हीनता महसूस करती है। जब स्वयं युवाओं को हिन्दी का ज्ञान नहीं है, तो आने वाली पीढ़ी को वे क्या सिखाएंगे? सच्चाई यह है कि हर भाषा का सम्मान होना चाहिए, पर मातृभाषा हिन्दी को सम्मान और गर्व के साथ अपनाना हम सबका कर्तव्य है। हिन्दी बोलना अपमान नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और स्वाभिमान का प्रतीक है।

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 हिन्दी : भारत के माथे की बिंदी 

हिन्दी हमारे जीवन का परिचय है, यह ज्ञान की अमर ज्योति है और भारत के माथे की बिंदी है। भारतीय समाज के तन, मन और जीवन में रची-बसी हिन्दी अपनेपन का सागर है। इसकी मधुर वाणी में भाषण की गूंज है और कबीर का फक्कड़पन, तुलसी का समन्वय तथा सूरदास का वात्सल्य समाया हुआ है।मीराबाई का प्रेम, जायसी का वियोग और घनानंद की पीड़ा हिन्दी की संवेदनाओं में झलकती है। जयशंकर प्रसाद के आँसू, निराला का संघर्ष, पंत का परिवर्तन और महादेवी का रहस्यवाद इसमें जीवन का विस्तार पाते हैं।

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 हिंदी : हिंद देश का हृदय स्पंदन 

हिंदी हिंद देश का हृदय है। यह केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और अस्मिता का ध्वज है। पौराणिक ग्रंथों की महिमा, संतों की वाणी और क्रांति के स्वर सभी हिंदी में गूँजते हैं। मां की लोरी-सी निर्मल और सभी रसों की खान यह भाषा राष्ट्र की आत्मा को स्पंदित करती है। कबीर, तुलसी, सूर, जायसी और मीरा की भक्ति की छवि इसमें झलकती है। यही कारण है कि हिंदी हमारी आन-बान-शान ही नहीं, बल्कि भारत का अभिमान है। हमें इसे केवल राजभाषा ही नहीं, बल्कि राष्ट्रभाषा का सम्मान देना चाहिए।

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हिंदी में हँसी, हिंदी में प्यार

आज हिंदी दिवस पर सबको याद दिलाएँ – अंग्रेज़ी नहीं, अपनी प्यारी हिंदी बोलें! बात करें, हँसी-मज़ाक करें और इसे दिल से अपनाएँ। क्योंकि हिंदी है हमारी भाषा, हमारी पहचान।”

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हिंदी पर बिंदी

हम सभी मिलकर हिंदी को अपना अत्यंत महत्वपूर्ण भाषा बनाना चाहते हैं। केवल अंग्रेज़ी के सहारे हमारा देश नहीं चमक सकता, इसलिए हमें हिंदी को आगे लाना होगा। आज से हम अपने सभी कार्य हिंदी में करेंगे और इसे देश की सर्वश्रेष्ठ पहचान दिलाएंगे। जब हम सभी हिंदी में संवाद करेंगे और अपने काम इसी भाषा में करेंगे, तभी देश का विकास वास्तविक रूप से संभव होगा। यह हमारा दृढ़ संकल्प है कि अंग्रेज़ी को राजभाषा मानने के बजाय हम हिंदी को अपनाएँगे और इसे सभी के बीच फैलाएँगे।

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दिलों को जोड़ती, नफरतों को तोड़ती हिंदी

हिंदी अपनी निर्बाध गति से आगे बढ़ती है और लोगों के दिलों को जोड़ती है। यह हिंदुस्तान का हृदय बनकर अपनी सरल और सहज चाल से सबको साथ लेती है। हिंदी संस्कृतियों के बीच पुल बनाती है और वर्जनाओं को तोड़ती है। यह सुहृदयजनों के भावों को अपनी ओर मोड़ती है और परंपराओं को तोड़कर नई परंपराएं बनाती है। हिंदी राम-रहीम और कृष्ण-करीम जैसी एकता को सामने लाती है, बंटी-बबली जैसी कहानियों को अपनाती है और अनेक भाषाओं के दरिया को अपनी ओर मोड़ती है। यह पूरब, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण से दिलों को जोड़ती है, प्रेम और इंसानियत को बढ़ाती है और नफरतों को दूर करती है।

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मैं हिंदी बोल रही हूँ

हिंदी ने वर्षों से भारतीय संस्कृति, साहित्य और जनजीवन में गहरी जड़ें जमा रखी हैं। यह अपने देश में राजभाषा के रूप में पूर्ण सम्मान की आकांक्षा रखती है। विदेशी विश्वविद्यालयों और विश्व हिंदी सम्मेलनों में इसका सम्मान है, मगर अपने देश में इसे संवैधानिक रूप से राष्ट्रभाषा घोषित नहीं किया गया। यह पाठ हिंदी के गौरव, संघर्ष और उसके महत्व को बखूबी उजागर करता है।

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हिंदी दिवस

यह कविता हिंदी भाषा के महत्व और सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करती है। इसमें बताया गया है कि हमारी भावनाएँ, प्रेम, ज्ञान और भक्ति—सभी हिंदी में अभिव्यक्त होती हैं। पहले शब्दों से लेकर वेद, उपनिषद और गीता तक, पूजा-अर्चना और भजन तक, हिंदी भाषा हमारे जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। हिंदी दिवस का यह संदेश हमें अपनी मातृभाषा को पढ़ने, लिखने और अपनाने के लिए प्रेरित करता है।

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परत दर परत सी ज़िंदगी

मंजुला श्रीवास्तवा, प्रसिद्ध साहित्यकार, परत दर परत सी ज़िंदगी,कुछ चीन्ही, कुछ अनचीन्ही सी,कुछ अनुभूत तत्व कथ्य सी,कुछ परिधि में, कुछ परिधि से बाहर,कुछ कही, कुछ अनकही सी।परत दर परत सी ज़िंदगी,क्या कहूँ, किससे कहूँ। एक वो जो हम हो नहीं पाए,या तुमने होने नहीं दिया।एक मानचित्र जो नक्शे में है,और एक जो तलुओं और हथेलियों…

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हिंदी भाषा, हिंदी बोली

हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर और आत्मीयता की अभिव्यक्ति है। कविताएँ, कहानियाँ और शास्त्रिक ज्ञान इसे जीवंत बनाते हैं। इसकी मधुर ध्वनि, सरल व्याकरण और शृंगारी रूपरेखा भावनाओं को सीधे हृदय तक पहुँचाती हैं। हिंदी हमें भारतीय संस्कृति, ज्ञान और प्रेम से जोड़ती है, और यह भाषा हमारी पहचान और गर्व का प्रतीक है।

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