जब प्यार ने भव्य डेट्स छोड़कर ज़िंदगी का हाथ थाम लिया

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे
आज के दौर में प्यार अब स़िर्फ कैंडललाइट डिनर और सरप्राइज़ गिफ्ट्स तक सीमित नहीं है. व्यस्त ज़िंदगी, साझा जिम्मेदारियों और बदलते रिश्तों के बीच एक नया ट्रेंड उभर रहा हैकोरमांस, जहाँ प्रेम रोज़मर्रा के कामों में पनपता है.
एक समय था जब रोमांस की पहचान बड़े इशारों से होती थी.फैंसी डेट्स, महंगे तोह़फे और सोशल मीडिया पर दिखने वाली परफेक्ट तस्वीरें.लेकिन आज, जब समय और ऊर्जा दोनों सीमित हैं, रिश्तों की प्राथमिकताएँ बदल रही हैं. प्यार अब दिखावे से ज़्यादा साथ निभाने में झलकता है.यहीं से कोरमांस की अवधारणा जन्म लेती है.
क्या है कोरमांस?
कोरमांस यानी रिश्ते और ज़िम्मेदारियों का मेल है.इसमें डेट्स किसी रेस्टोरेंट या ट्रिप तक सीमित नहीं रहते, बल्कि रसोई, ड्रॉइंग रूम और किराने की दुकान तक फैल जाते हैं. साथ बर्तन धोना, कपड़े तह करना, या शाम का खाना मिलकर बनाना. ये छोटे-छोटे काम अब नए जमाने के डेट बनते जा रहे हैं. यह ट्रेंड भावनात्मक परिपक्वता को दर्शाता है, जहाँ प्यार शब्दों या तस्वीरों से नहीं, विश्वसनीयता और साझेदारी से साबित होता है.
क्यों बढ़ रही है कोरमांस की लोकप्रियता?
आज अधिकतर कपल्स शादी से पहले साथ रह रहे हैं. करियर और निजी जीवन में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं. पारंपरिक जेंडर रोल्स से बाहर निकलना चाहते हैं. ऐसे में रिश्ते मदद पर नहीं, साझा जिम्मेदारी पर टिकते हैं. कोरमांस इसी सोच को मज़बूती देता हैजहाँ घर और जीवन, दोनों मिलकर संभाले जाते हैं.
दिखावटी डेटिंग से दूरी
सोशल मीडिया के दौर में रिश्ते भी परफॉर्मेंस बनते जा रहे हैं. हर डेट को खूबसूरत दिखाना, हर पल को कैमरे में कैद करनायह थकाने वाला हो सकता है. कोरमांस इस दिखावे से बाहर निकलने का रास्ता देता है.यह वह रिश्ता है जो तस्वीरों में भले न जचे, लेकिन हकीकत में मजबूत होता है.
छोटे काम, गहरा भरोसा
मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि साथ मिलकर किए गए साधारण काम रिश्तों में भरोसा बढ़ाते हैं. क्योंकि असली परीक्षा रोमांटिक पलों में नहीं, बल्कि उबाऊ और थकाऊ समय में होती है.डिनर पर हर कोई मुस्कुरा सकता है,लेकिन देर रात सिंक स़ाफ करते समय साथ रहना यही असली अंतरंगता है.
रोमांस का अंत नहीं, उसकी बुनियाद
कोरमांस रोमांस को खत्म नहीं करता. वह उसे टिकाऊ बनाता है.
जब रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सहयोग और संतुलन होता है, तो स्नेह अपने आप लौट आता है. तब रोमांस किसी ज़रूरत की तरह नहीं, बल्कि एक खूबसूरत अतिरिक्त एहसास की तरह महसूस होता है.
नए दौर का प्रेम-सूत्र
आज प्यार ऊँची आवाज़ में नहीं बोलता. वह धीरे से कहता है
तुम आराम करो, मैं संभाल लूँगा. हम साथ हैं. कोरमांस शायद सुर्खियाँ न बने,लेकिन यह रिश्तों को लंबा जीवन देता है. और आज की भागदौड़ भरी दुनिया में,टिके रहना ही सबसे बड़ा रोमांस है.
बहुत सुंदर लिखा है
बहुत प्यार लिखा एकदम हकीकत है और वर्तमान की मांग है
सार्थक अभिव्यक्ति