शमा और जिंदगी
काली रात में थरथराती हुई शमा की लौ अपने सपनों का प्रकाश लेकर जलती रहती है, चाहे हवा के झोंके उसे बुझाने की कोशिश करें। इसी तरह, ज़िंदगी भी निरंतर संघर्ष और कठिनाइयों के बीच आशाओं के साथ खड़ी रहती है। शमा दूसरों के अंधकार को दूर करने के लिए जलती है, और ज़िंदगी अपने पथ पर सपनों को आगे बढ़ाने के लिए बढ़ती रहती है। लौ का कंपकंपाना डर और अस्थिरता का प्रतीक है, लेकिन बुझने से पहले यह सौ गुना उजाला फैलाती है। शमा और जीवन दोनों यही सिखाते हैं—जलते रहो, उजागर रहो, संघर्ष और प्रकाश को अपनाओ, क्योंकि हर रात के बाद प्रभात अवश्य आता है।