बीएमसी की हार… क्योंकि मुंबई बदल रही है

बीएमसी चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन की कहानी नहीं है, बल्कि यह मुंबई के बदलते मतदाता और राजनीति की नई प्राथमिकताओं का संकेत है। भावनात्मक अपील से आगे बढ़कर अब शहर स्थिर शासन, विकास और स्पष्ट नेतृत्व चाहता है। यही बदलाव ठाकरे युग के अंत और नई राजनीति की शुरुआत को परिभाषित करता है।

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अब तो और भारी हो गए मोहन यादव

बिहार चुनाव की सुगबुगाहट शुरु होने से पहले मध्य प्रदेश के मोहन विरोधी नेताओं ने ऐसा माहोल बनाया था कि दिल्ली बहुत नाराज है। सीएम जितनी बार दिल्ली जाते हैं, अमित शाह फटकार लगाते हैं। केंद्र में मंत्री एक नेता ने तो सार्वजनिक मंच से बयान दे डाला था कि किसानों के हितों के लिये मुझे आंदोलन करना पड़ा तो पीछे नहीं हटूंगा। उनका यह बयान इसलिये भी दिल्ली के नेताओं को रास नहीं आया कि मप्र में सरकार भाजपा की ही है तो ऐसा बयान क्यों दिया।

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कॉपी, किताब, नोटबुक्स टैक्स फ्री और रॉ मटेरियल पर 18 % जीएसटी

सरकारी प्रचार तंत्र भले ही जीएसटी दरों को कम करने को देश में उत्सवी माहौल बताए लेकिन हकीकत में कुछ व्यापारी खुश नहीं है। कॉपी, नोटबुक्स, किताब निर्माताओं से तो किसी ने जानने की कोशिश ही नहीं की है कि 22 सितंबर से लागू जीएसटी की नई दरें उनका तनाव क्यों बढ़ा रही हैं।निर्माता वर्ग की पीड़ा है सरकार ने बस घोषणा ही की है, हमारा कान तो पीछे से पकड़ कर जोर से दबा दिया है।

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