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एक उदास महिला खिड़की के पास बैठी है, आंखों में आँसू, हाथ में पुरानी चिट्ठी, धुंधली रोशनी में प्रेम और विरह की भावना झलकती हुई।

इश्क़ की इंतहा

राँची, झारखंड की कवयित्री अर्पणा सिंह की यह मार्मिक ग़ज़ल प्रेम, विरह, तड़प और आत्मिक समर्पण की गहराइयों को उजागर करती है। “ज़िंदगी में तुम नहीं तो ज़िंदगी कुछ भी नहीं” पंक्ति के माध्यम से प्रेम की पूर्णता और विरह की पीड़ा का संवेदनशील चित्रण किया गया है।

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घर के कोने में अकेली बैठी एक भारतीय महिला, शांत लेकिन उदास चेहरा, पास में सजा हुआ घर और दीवार पर टंगी परिवार की तस्वीरें

मुझे अच्छा नहीं लगता…

“मुझे अच्छा नहीं लगता” एक संवेदनशील हिंदी कविता है, जो एक गृहिणी के अनदेखे श्रम, भावनात्मक अकेलेपन और उपेक्षा के दर्द को उजागर करती है। यह रचना उन स्त्रियों की आवाज़ है, जो परिवार के लिए सब कुछ समर्पित कर देती हैं, लेकिन बदले में मान-सम्मान की कमी महसूस करती हैं।

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सड़क पर अपमानित खड़ी एक रोती हुई युवती, पृष्ठभूमि में धुंधला शहर और भावुक माहौल

मोहब्बत एक ज़हर

“मोहब्बत एक ज़हर” एक मार्मिक हिंदी कविता है, जो प्रेम में अपमान, सामाजिक भय, और माता-पिता के सम्मान के बोझ तले टूटती एक बेटी की पीड़ा को दर्शाती है। यह कविता युवा भावनाओं, पछतावे और परिवार की प्रतिष्ठा के संघर्ष को संवेदनशील शब्दों में अभिव्यक्त करती है।

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फिल्म शूटिंग का दृश्य

फिल्म शूटिंग से रेलवे की कमाई 1.72 करोड़ रुपये पार

पश्चिम रेलवे ने 2025–26 में फिल्म शूटिंग से 1.72 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड आय अर्जित की है. सिंगल विंडो अनुमति प्रणाली और वंदे भारत एक्सप्रेस में शूटिंग की स्वीकृति ने गैर-किराया राजस्व बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है.

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मोहे अपने ही रंग में रंग लो गिरधारी

अपने ही रंग में रंग लो…

“मोहे अपने ही रंग में रंग लो गिरधारी” फागुन और होली के उल्लास में डूबी एक गहन आध्यात्मिक रचना है। यह कविता बाहरी रंगों की चंचलता से आगे बढ़कर उस दिव्य प्रेम की तलाश करती है, जो आत्मा को भीतर तक भिगो दे। ब्रज की होली, उड़ते गुलाल, ढोल-मंजीरे की थाप और सखियों की हंसी के बीच कवयित्री का मन केवल एक ही रंग चाहता है

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गुलाल, गीत और मुस्कान

मातृशक्ति भजन मंडली न्यू शिवाजी नगर के फाग उत्सव 2026 में राधा-कृष्ण झांकी, भजन और रंग-गुलाल की मस्ती ने माहौल को भक्तिमय और आनंदमय बना दिया।

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मुंबई के केशव गोरे स्मारक भवन में आयोजित ‘बतरस’ कार्यक्रम में प्रेम विषय पर कविता और संगीत प्रस्तुति देते कलाकार

मुंबई में ‘बतरस’ ने रचा प्रेम का बहुरंगी महोत्सव

बतरस’ द्वारा आयोजित ‘है प्रेम जगत में सार’ कार्यक्रम में कवि विनोद दास ने प्रेम को सांस्कृतिक प्रतिरोध बताते हुए समाज में संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। कविता, गीत और नाट्य प्रस्तुतियों ने शाम को यादगार बना दिया।

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स्त्री शक्ति संगठन की गोष्ठी में महिला स्वास्थ्य पर चर्चा करती महिलाएं

स्त्री शक्ति संगठन की विचार गोष्ठी

स्त्री शक्ति संगठन द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी में ‘गुप्त रोग एवं महिलाएं’ विषय पर गंभीर चर्चा की गई। कार्यक्रम में महिलाओं के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर खुलकर संवाद करने का संदेश दिया गया।

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माँ तेरा आँचल – हृदयस्पर्शी हिंदी कविता

माँ तेरा आँचल…

‘माँ तेरा आँचल’ कविता माँ के स्नेह, ममता और सुरक्षा के उस भावलोक को चित्रित करती है जहाँ आँचल ही संसार बन जाता है। यह रचना बचपन की स्मृतियों और मातृत्व की गरिमा को सरल शब्दों में जीवंत कर देती है।

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