एक मंच, दो पीढ़ियाँ और साहित्य की साझा विरासत

कल्पकथा साहित्य संस्था द्वारा नागपुर की मेघा अग्रवाल और उनकी पुत्री मिहूं अग्रवाल को कल्प भेंटवार्ता पत्रम से सम्मानित करते हुए

मां-बेटी की की जोड़ी ने रचा कल्पकथा के मंच पर यादगार क्षण

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे

नागपुर | साहित्य जब पीढ़ियों को जोड़ दे, तब वह केवल रचना नहीं रहता, बल्कि संस्कार बन जाता है। ऐसा ही एक भावपूर्ण और प्रेरक दृश्य उस समय सामने आया, जब नागपुर की माता श्रीमती मेघा अग्रवाल एवं उनकी पुत्री कु. मिहूं अग्रवाल को कल्पकथा साहित्य संस्था द्वारा एक ही मंच पर “कल्प भेंटवार्ता पत्रम” से सम्मानित किया गया।

प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित कल्पकथा साहित्य संस्था के स्थापना माह विशेष कार्यक्रम “दो पीढ़ियाँ एक साथ” में यह सम्मान केवल उपलब्धि का नहीं, बल्कि साहित्यिक संस्कारों की निरंतरता का प्रतीक बन गया।

संस्था के संस्थापक श्री पवनेश मिश्र, आ. राधा श्री शर्मा एवं संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह ने बताया कि यह आयोजन विशेष रूप से उस विचार को समर्पित था, जहाँ माँ से पुत्री तक साहित्य केवल सीखा ही नहीं गया, बल्कि जिया गया।

कार्यक्रम के प्रेरक संवाद सत्र में कवयित्री मेघा अग्रवाल ने जब समाज और सत्य पर अपने विचार साझा किए, तो शब्दों में अनुभव की गहराई साफ़ झलकती दिखी। वहीं, उनकी पुत्री मिहूं अग्रवाल ने अपने सहज, आत्मविश्वासी और बहुमुखी व्यक्तित्व से यह सिद्ध किया कि नई पीढ़ी साहित्य को बोझ नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति का माध्यम मानती है।

कल्पकथा के यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारित इस कार्यक्रम में डॉ. जया शर्मा प्रियंवदा ने कहा “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त माता और प्रतिभाशाली पुत्री को एक साथ सम्मानित करना, कल्पकथा के समूचे पटल के लिए गर्व का क्षण है।”

चार चरणों व्यक्तिगत परिचय, साहित्यिक यात्रा, दर्शकों के प्रश्न और ‘चटपटे प्रश्न–अटपटे उत्तर’ के माध्यम से दर्शकों को माँ–पुत्री के भीतर छिपे साहित्यिक संसार से रूबरू होने का अवसर मिला।

कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुआ, जिसने वातावरण को भावुक और राष्ट्रभाव से ओतप्रोत कर दिया।इस सम्मान से नागपुरवासियों में विशेष उत्साह देखा गया। साहित्य प्रेमियों का मानना है कि मेघा अग्रवाल और मिहूं अग्रवाल की यह जोड़ी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरक उदाहरण बनेगी जहाँ परिवार, संस्कार और साहित्य एक-दूसरे के पूरक हैं। कल्पकथा साहित्य संस्था द्वारा किया गया यह सम्मान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह संदेश है कि जब साहित्य घर से निकलकर मंच तक पहुँचता है, तब वह इतिहास रचता है।

One thought on “एक मंच, दो पीढ़ियाँ और साहित्य की साझा विरासत

  1. धन्यवाद आदरणीय सुरेश जी 🙏

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