मोबाइल की दुनिया

मोबाइल की लत में डूबा समाज दर्शाती हिंदी कविता “मोबाइल की दुनिया” मोबाइल सुविधा का माध्यम है, लेकिन अंधी लत रिश्तों और मूल्यों को प्रभावित कर रही है।

चन्द्रवती दीक्षित, करनाल / हरियाणा

परिवर्तन प्रकृति का नियम,
इसके साथ चलना ज़रूरी।
ज़रूरत से ज़्यादा अमृत भी,
बन जाता है सर्वत्र मजबूरी।

हर आविष्कार का मतलब सृजन,
आवश्यकतानुसार करें प्रयोग।
आधुनिकता की खोखली होड़ में,
मोबाइल का कर रहे दुरुपयोग।

हर तरह का ज्ञान इसमें,
शिक्षा से स्वास्थ्य तक।
इसकी अंधाधुंध भूख ने,
दे दी विनाश को दस्तक।

पढ़ाई, खेल, चिकित्सा, संचार,
आध्यात्मिक हों या अंतरराष्ट्रीय।
हर क्षेत्र के काम में समर्थ,
इसकी वासनामयी चाह खो रही आधार राष्ट्रीय।

रिश्तों की मिठास हुई गुम,
अंधकार में डूबा बचपन।
युवावर्ग मंज़िल से भटका,
बड़े-बुज़ुर्गों को मिल रही तपन।

इसके टावरों की घातक किरणें,
लील रही सबका जीवन।
सही महत्व यदि इसका समझें,
ये बने ज़िंदगी में संजीवन।

अध्यात्म से नाता तोड़ा,
भूल गए खाना-पीना।
परिवार, समाज, देश को नकारा,
सीखा केवल मोबाइल संग जीना।

विषैली प्रवृत्ति के लोग,
इसके बल पर घोल रहे ज़हर।
किसी की निजी ज़िंदगी बिगाड़ें,
मचा रहे सृष्टि में कहर।

जब जागें तभी सवेरा,
कोशिश से बनें करामात।
मोबाइल की अंधी लत छोड़ें,
सर्वत्र होगी खुशियों की बरसात।

One thought on “मोबाइल की दुनिया

  1. मोबाइल का गलत प्रयोग उसके सही इस्तेमाल से ज्यादा प्रचलित हो गया है । यह विकृति किसी का जीवन बिगाड़ सकती है , इसकी सम्भावना लोगों के चरित्र का पतन हद से ज़्यादा
    कर रही है ।

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