
प्रफुल्ल शर्मा, प्रसिद्ध साहित्यकार, उज्जैन
मैं इक दिन की रानी हूं
कह दो या महारानी हूं
हिन्दी मेरा नाम है
भाषाओं की नानी हूं
उर्दू मेरी बहना है
संग सदा ही रहना है
फूले फले खूब बढ़े
मुझको बस यह कहना है
याद मुझे,कल,करना फिर
पढ़ना लिखना,करना फिर
मेरा दिवस बीत जाए जब
याद मुझे तब करना फिर