हिंसा और अहिंसा

चन्द्र प्रकाश पाठक, जौनपुर (उत्तर प्रदेश)

सत्य मार्ग पर चलने वाले
सेवा व्रत धारण करने वाले
आदर्शों को अपनाने वाले
जीवन में खुशियां लाने वाले

तिल तिल कर जो मरता है
हाथ पसारे पूछ रहा है
उसको ना कुछ सूझ रहा है
मुझको आकर बतला दे कोई
हिंसा और अहिंसा क्या है?

प्यास के मारे तड़प रहा है
सामने है जो अकड़ रहा है
कसकर उसको पकड़ रहा है
वह सबसे चिल्ला कर कहता
हिंसा और अहिंसा क्या है?

तन मन वचन करम से धारे
दुखियों को जो रहे उबारे
वह भी सबसे पूछ रहा है
जीवन में क्या बीत रहा है
चाहे कोई तन को मारे
चाहे कोई मन को मारे
मार शब्द दोनों में प्यारे
अब सबको क्या बतलाऊं
हिंसा और अहिंसा क्या है?

जीवन में मुस्कान दिया जो
कभी किसी को प्राण दान दिया जो
बहती नदिया सा निर्मल जो
झरना भी कहता कल कल जो
बिन लोरी जो नींद को लावे
संध्या सबके मन को भावे
यह जन ना छोड़ें किसको
मंद मंद मुस्काकर कहता
हिंसा और अहिंसा क्या है?

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