सितंबर अहा!

सितंबर अहा! नवाँ मास,
ऋतु-संधि का मधुर प्रकाश।

बरखा ढलती, शरद मुस्काए,
धरती हरियाली में छाए।

धान–मक्का संग प्रेम जताएँ,
गेंदा–कमल महक फैलाएँ।

पूर्वज लौटें, पितृपक्ष आए,
गणपति संग उत्सव छाए।

नीलम गगन, पुखराज सूरज,
मन के आँगन जागे पूरज।

नवजीवन का नया उजास,
सितंबर अहा! नवाँ मास।

सवितासिंह मीरा, प्रसिद्ध कवयित्री, जमशेदपुर

One thought on “सितंबर अहा!

  1. सितम्बर माह की हल्की धूप और नरम ‐ गर्म हवा मे आहट शरद ऋतु की , बहुत सुंदर अभिव्यक्ति
    लेखिका बधाई की पात्र।

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