सिगड़ी से आंख फेरी तो गैस भट्टी में झुलसने लगी सराफा चौपाटी !

••• जितना खतरा चौपाटी दुकानदारों से उतना खतरा बंगाली कारीगरों से भी

जिन सराफा व्यापारियों ने दशकों पहले अपने ओटले किराए पर देकर सराफा चौपाटी के दुकानदारों को कंधे पर बैठाया आखिर वही क्यों अब उन्हें यहां से भगाने पर आमादा हो गए। कुछ सालों में बने इस हालात की एक बड़ी वजह है सिगड़ी के सम्मान को भूल कर चौपाटी की दुकानों में गैस भट्टी का मोह बढ़ता जाना ।
संकरी गलियों वाले सराफा क्षेत्र में चाट-व्यंजन की इन दुकानों का इतिहास करीब नौ दशक पुराना है। तब चौपाटी के दुकानदार खानपान की सामग्री घर से ही बना कर लाते थे और इस खाद्य सामग्री को गर्म रखने के लिए कोयले वाली सिगड़ियों का इस्तेमाल करते थे। फिर चाहे गुलाब जामुन हो, भुट्टे का किस हो या अन्य सामग्री। सिगड़ी की आंच से टेस्ट तो बरकरार रहता ही था, साथ ही लपटें उठने, आगजनी की घटना की भी आशंका नहीं रहती थी।
तब दुकानों की संख्या भी इतनी नहीं थी लेकिन इन दो-तीन दशकों में सराफा क्षेत्र में कमर्शियल काम्प्लेक्स बनते जाने के साथ ही ज्वेलर्स दुकानें तलघर में भी शुरु हो गई हैं साथ ही चौपाटी की दुकानों में भी इजाफा हुआ है। ‘टेस्ट में बेस्ट’ पसंद करने वाले इंदौर के लोग चाहे पोहे हों, जलेबी, गुलाब जामुन सेव, कचोरी हो या दूध का कड़ाव हो या गराडू, घान से उतरी गरमागरम सामग्री खाना ही पसंद करते हैं इसलिये सिगड़ी को छोड़ कर लगभग सभी दुकानदार गैस टंकी और भट्टी का उपयोग कर रहे हैं।
बड़ा-छोटा सराफा वाली यह चौपाटी भी धीरे धीरे बोहरा बाजार, शक्कर बाजार पीपली बाजार आदि संकरी गलियों वाले क्षेत्र में फैलती जा रही हैं। इन क्षेत्रों के रहवासी भी देर रात तक चलने वाली चौपाटी और हो हल्ले से त्रस्त हैं। गैस भट्टी से संचालित हो रही चौपाटी की इन दुकानों से अब तक आगजनी की कोई बड़ी घटना नहीं हुई है लेकिन किसी भी दिन गैस टंकी में ब्लास्ट हो गया या खौलते तेल की कढ़ाई रात में उमड़ने वाली भीड़ के टल्ले या भगदड़ से पलट गई तो…? कल्पना कर के ही सिहरन हो जाती है। सराफा में सांवरिया चाट हाउस के मालिक पर आग फैलने के मामले में पिछले दिनों केस दर्ज हो चुका है।
चौपाटी से नाराज, बंगाली कारीगरों को पनाह
सराफा चौपाटी दुकानदारों को अब जनहानि के लिए खतरा बताने वाले ज्वेलर्स उन हजारों बंगाली कारीगरों के आश्रयदाता बने हुए हैं जो इन दुकानदारों के ग्राहकों के सोने-चांदी के आभूषण में टांका लगाने से लेकर डिजाइनदार जेवर बनाने के लिए सोना गलाने के लिए गैस भट्टी का वर्षों से इस्तेमाल कर रहे हैं। जिन आभूषण की दुकान संचालित करने वाले लगभन सभी दुकानदारों ने अपने सिर पर बंगाली कारीगरों को आश्रय इसलिए भी दे रखा है कि कई ग्राहक जो हाथोंहाथ जेवर सुधरवाना चाहते हैं उन्हें खाली हाथ ना लौटाना पड़े। इन संकरी गलियों में यदि चौपाटी की दुकानों पर गैस भट्टी का इस्तेमाल खतरनाक माना जाए तो छोटी छोटी कोठरी में बंगाली कारीगरों द्वारा सोना-चांदी गलाने में तेजाब सहित गैस भट्टी का इस्तेमाल कैसे सुरक्षित माना जा सकता है। यदि सराफा क्षेत्र की संकरी गलियों में फायरब्रिगेड वाहन का नहीं घुस पाना दोनों ही मामलों में चुनौतीपूर्ण है।
पहले तो राजबाड़ा पर अन्ना भैया की पान दुकान से लेकर सराफा चौपाटी पर रतजगा ही चलता था। बाद में प्रशासन ने इन दुकानों को बारह बजे तक चालू रखने के निर्देश दिए लेकिन इसके पालन में स्थानीय थाने द्वारा ढिलाई दी जाती रही है। सराफा चौपाटी में उमड़ने वाली भीड़ के वाहनों की पार्किंग के लिये स्थान निर्धारित नहीं होने से चाहे जहां वाहन पार्क करने से ये संकरी गलियां और संकरी हो जाती हैं।इस कारण भी बोहरा बाखल व शक्कर बाजार में रहने वाले परिवार आए दिन परेशान होते रहते हैं।
▪️किराए का लालच, नौकरों को शह
सराफा चौपाटी को स्थानांतरित करने को लेकर लामबंद हुए व्यापारियों में कई ऐसे भी है जिन्होंने 25से 40 हजार तक के किराए पर अपने ओटले किराए पर दे रखे हैं। यही नहीं कई दुकानों के नौकर और चौकीदार रात में चौपाटी वाले दुकानदार भी हो गए हैं। सराफा व्यापारी के यहां शाम तक लगभग मुफ्त में काम करने वाले ये लोग अपनी मजदूरी उसी ओटले पर व्यंजन की दुकान लगा कर निकाल लेते हैं।
▪️प्रशासन ले सब के हित में निर्णय
सराफा दुकानदार परेशान न हों, चौपाटी दुकानदारों का कारोबार भी प्रभावित न हो इस दिशा में नगर निगम, जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और दोनों एसोसिएशन के पदाधिकारियों को बैठा कर सर्व सम्मत हल निकालना चाहिए। नगर निगम की समिति ने रिपोर्ट देकर अपना काम जरूर पूरा कर लिया लेकिन यही नगर निगम वार्डों में दुकानदारों के लिए मार्केट बनाने की घोषणा पर काम नहीं कर पाया है। चौपाटी दुकानदारों को लालबाग, गाधी हाल, रीवर साइड रोड या अन्य कहीं भी जगह दे, इन दुकानदारों की सुरक्षा के साथ ही उन क्षेत्रों में असामाजिक तत्व सक्रिय ना हो इस पर भी पहल करना होगी।
▪️बंगाली कारीगरों को भी शिफ्ट करें
सराफा दुकानदारों ने जिन हजारों बंगाली कारीगरों को अपनी इमारतों में किराए पर कमरे दे रखे हैं उन सब को भी कहीं शिफ्ट करना चाहिए। नगर निगम-सराफा व्यापारी मिल कर पीपीपी मॉडल पर कॉम्प्लेक्स की दिशा में काम कर सकते हैं।

रात्रिकालीन सराफा चौपाटी की शिफ्टिंग की तैयारियों के बीच रात्रिकालीन सराफा चौपाटी एसोसिएशन के सदस्यों ने गुरुवार को चौपाटी संचालन के लिए गठित समिति के अध्यक्ष राजेंद्र राठौर और सदस्य निरंजनसिंह चौहान से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।
गरम व्यंजनों की दुकानों पर गैस भट्टी का उपयोग होता है। अग्निशमन यंत्र की अनिवार्यता का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। कुछ व्यापारी चौपाटी बंद होने के बाद सडक पर गंदगी करते हैं। व्यापारी निगम के सहयोग से हर 15 दिन में सड़क की धुलाई करवाना चाहते हैं। इसका शुल्क एसोसिएशन वहन करेगा।

यहां आने वाले लोग चौपाटी पहुंच मार्ग पर कहीं भी वाहन पार्क कर देते हैं। चौपाटी में लगने वाले स्टॉल में बड़ी गैस भट्टी का उपयोग किया जाता है, जिससे कभी भी आगजनी की स्थिति बन सकती है। देखने में आया है कि यहां स्थित दुकानों में कोई अग्निशमन यंत्र नहीं है। हाल में फायर ब्रिगेड नहीं पहुंच सकती : हालात यह हैं कि चौपाटी के समय आगजनी की बड़ी घटना हो जाए तो यहां फायर ब्रिगेड भी नहीं पहुंच सकती। यहां के स्वर्णकार व्यापारी अपनी दुकानों के आगे स्टॉल लगाने वालों से प्रतिमाह रुपए लेते हैं।

दो वर्ष पूर्व हरदा की पटाखा फैक्टरी पर हुए विस्फोट और जनहानि के बाद इंदौर की सराफा चाट चौपाटी की सुरक्षा को लेकर नगर निगम को चिंता हुई और एक समिति का गठन कर जांच कराई गई। इसमें यह निष्कर्ष निकला कि सराफा चौपाटी बारूद के ढेर पर बैठी है, क्योंकि यह चौपाटी खुले में लगती है और यहां संकरी गलियों में गैस भट्टियों का बगैर किसी सुरक्षा व्यवस्था के इस्तेमाल होता है। सराफा की कई चाट की दुकानों में फुटपाथ पर ही सामग्री तत्काल निर्मित की जाती है। सराफा में सोना-चांदी का कार्य होता है और उसमें तेजाब की जरूरत रहती है, आभूषणों के निर्माण में गैस का उपयोग होता है, संकरी गलियां और कोई अनहोनी होने पर फायर ब्रिगेड के वाहनों को पहुंचने में कई तकलीफों को देखते हुए चौपाटी पर रोज आने वाले सैक ड़ों लोगों की सुरक्षा प्रमुख मुद्दा बन गया है।

निगम कर रहा शिफ्ट करने पर विचार
नगर निगम की रिपोर्ट के बाद से इस खान-पान की चौपाटी को शिफ्ट करने का विचार इंदौर नगर निगम कर रहा है। पिछले दिनों सराफा व्यापारियों ने भी मिठाइयों और नमकीन की परंपरागत दुकानों को छोड़कर अन्य दुकानों को शिफ्ट करने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन किया था।

सराफा कारोबार हो रहा प्रभावित
सराफा व्यापारियों का यह भी कहना है कि रात में चौपाटी लगाने वाले दुकानदार शाम होने के पूर्व ही आ जाते हैं और उनकी जेवर की दुकानों के आगे दुकानें लगाते हैं और रोकने पर विवाद करते हैं। उन्होंने करीब 80 परंपरागत खाद्य पदार्थों की दुकानों को ही चौपाटी पर लगने देने और शेष दुकानों को अन्यत्र शिफ्ट करने की मांग की है। वहीं, कुछ सराफा व्यापारी चाहते हैं कि चाट चौपाटी की दुकानें लगें तो सभी लगें, नहीं तो एक भी नहीं रहनी चाहिए। हाल ही में यहां रात के समय नशे में लोगों के आने और विवाद करने के भी मामले सामने आए हैं। इसे लेकर भी सराफा व्यापारी इसे शिफ्ट कराने के पक्षधर हैं।

इंदौर से वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा की रिपोर्ट

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