सागर सा वजूद

शैल अग्रवाल, प्रसिद्ध लेखिका, गाजियाबाद

तेरा वज़ूद समुद्र सा, गोहर तलाश कर।
पहचान याद रख अपनी, सागर तलाश कर।

जिसकी तलाश में भटका,फ़िर भी नहीं मिला,
रहता ख़ुदा, ख़ुद में ही, तू अंदर तलाश कर।

दुनिया में घूम आए, नहीं है कहीं सुकूँ,
चाहत अगर सुकूँ की, तो घर पर तलाश कर।

किसको सुनाऊँ हाल- ए – दिल, मन उदास है
तुझको सुनाने ग़म गर, अम्बर तलाश कर।

मत हारना कभी भी, जज़्बा बनाए रख,
आते रहेंगें मौके, तू अवसर तलाश कर।

अफ़्कार छोड़, बढ तू शोहरत खड़ी मिले,
दानिश है , ज़िंदगी तू बेहतर तलाश कर।

रहता है लोकतंत्र कहाँ , कुछ बताओ तुम,
इस राजनीति के लिए, अक्षर तलाश कर।

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