लहरें…

शांत चित्त सौम्य,

आँखों की भाषा और

दिल की गहराई

मापना है कठिनतम!

लेकिन देख कर वो चँदा अपनी

हो उठता अधीर।

हो भी क्यों ना

पूनम का चाँद देखते ही

समुद्र की लहरें भी 

हो उठती हैं व्याकुल,

भर लेती हैं उफान

जैसे मिलन को तड़पता 

हो मन बहुत। 

सवितासिंह मीरा, प्रसिद्ध लेखिका, जमशेदपुर

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