
नुपूर परसरामपुरिया, नवोदित लेखिका, मुंबई
इस अंधेरी रात में मिल जाए
एक हमसफ़र का साथ
जो हाथ ना छोड़े
जो टुटे दिल को जोड़े
प्यार की कुर्बानी लाखों ने दी होगी
पर सच्चा हमसफ़र वो जो
जिंदगी में साथ निभाने का
करें इकरार
झूठ की अनगिनत कहानी से
हमारा सफर ना हो
सच के वादे पर हम अमर हो
वो महरुम की दवा बने
दुःख में खुशी का अफसाना बने
बारिश में छाता ना बन पाए तो भी चलेगा
बस वो एक बूंद की मुस्कुराहट की वज़ह बने
मैं बिखर जाऊं
मैं टूट जाए
पर उसकी उम्मीद मेरे संग धागे से
ऐसे बंधे कि
जिंदगी जीने का जज्बा
फिर से फूल की तरह खिलें
प्यार भले कम हो जाएं
पर विश्वास की बुनियाद पर
हमारी जिंदगी संवर जाए
काले बादल भी आएंगे
पर उसका मन मुझसे
बिछड़ने को ना करें
ना तारें चाहिए ना हीं खुला आसमान
पर उसकी बाहों के हर पल ले आए
सुकून का फरमान
बहुत अच्छा लिखा है 🙏🌹
Bahut badhiya Nupur
सराहनीय प्रयास.