तूफ़ानों से जब डगमगाई थी नाव मेरी,
एक सहारा मिला था — वो थे पापा मेरे।
जब दुनिया ने मुँह मोड़ा, राहें सब सूनी थीं,
पापा के आँगन में उम्मीदें बस जीती थीं।
बचपन से सीखा — उड़ान कैसे भरनी है,
डर से लड़ कर, दुनिया से कैसे भिड़नी है।
हर हार में उन्होंने मुझे मुस्कराना सिखाया,
हर गिरने पर खुद उठकर चलना सिखाया।
मेरे गाने की तान में उनकी दुआएं थीं,
मेरे शौक़ों में भी बस उनकी परछाइयाँ थीं।
जब सब छूट गया, जब जीवन थमने लगा,
पापा ने फिर से मेरा संसार सजाया।
मुझे नहीं, मेरी बेटी को भी गोद में उठाया,
अपने सीने से लगाकर घर फिर से बसाया।
वो खुद सादगी में, पर दिलों के राजा हैं,
रिश्ते निभाना जिनकी सबसे प्यारी अदा है।
पसीने से भीगे चेहरे पर मुस्कान सजती है,
जैसे सूरज की किरणें सुबह को जगती हैं।
पापा — आप मेरे भगवान हैं इस ज़मीं पर,
आपके बिना ये जीवन अधूरा सा है हर पल।
शुक्र है रब का, जिसने आपको मुझे दिया,
आप मेरे सबसे बड़े दोस्त हो, ये रिश्ता है सच्चा।
पापा, आपको दिल से सलाम!
आप हो तो मैं हूँ — मेरा हर ख्वाब, मेरी पहचान।

डिम्पल ओसवाल, बिजनेस वूमन, पुणे