मुंबई: जहां हर धक्का सिखाता है जीना

कभी-कभी ज़िंदगी हमें ऐसे अनुभव देती है, जो स़िर्फ निजी नहीं रहते बल्कि समाज का आईना भी बन जाते हैं. मुंबई का नाम आते ही दिमाग़ में कई तस्वीरें उभरती हैं हेरिटेज इमारतें, समंदर की लहरें, तेज़ रफ्तार लोकल ट्रेनें और गीले बालों से पर्स संभालती भागती लड़कियाँ. लेकिन इन सबके पीछे एक और सच्चाई भी हैसंघर्ष, अव्यवस्था और आत्मनिर्भर बनने की जद्दोजहद.
मुंबई का आकर्षण और हकीकत
मुंबई बाहर से जितनी आकर्षक लगती है, उतनी ही कठिन भी है. यहाँ की लोकल ट्रेनें इस शहर की धड़कन हैं. गेट पर लटककर सफर करती महिलाएँ, स्टेशन पर उमड़ती भीड़, और हर रोज़ की भागदौड़यह सब देखकर कभी रोमांच होता है, कभी थकान. लेकिन यही तस्वीर मुंबई की आत्मा भी है. यहाँ हर कोई अपनी-अपनी लड़ाई लड़ रहा है. कोई सपनों के लिए, कोई पेट के लिए और कोई अपनी पहचान के लिए.
मुंबई में पिछले 24 वर्षों से रह रही एक महिला का अनुभव इस शहर की असली पहचान को सामने लाता है. शादी के बाद वे मलाड से चर्चगेट रोज़ ट्रेन से पढ़ाई के लिए जाया करती थीं. शादी से पहले भी वे कई बार अकेले मुंबई आईं, लेकिन कभी डर महसूस नहीं हुआ. उनका कहना है. मुंबई की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह किसी को गुमराह नहीं करता.. उन्होंने अपने जीवन के ज़रूरी काम पासपोर्ट बनवाना हो, मैरिज सर्टिफिकेट लेना हो. सब कुछ अपने दम पर किया. ससुराल वालों को आश्चर्य हुआ कि बिना किसी सहारे के इतना कुछ कैसे हो सकता है. लेकिन उनकी सोच साफ थी. मैं न तो किसी को परेशान करना चाहती थी और न ही किसी पर निर्भर होकर जी सकती हूँ..
संघर्ष से सीखा, ईश्वर पर भरोसा रखा
मुश्किलें कम नहीं आईं. कई ग़लतियाँ हुईं, उनसे सबक मिला. बहुत कुछ खोया, लेकिन भगवान ने कभी साथ नहीं छोड़ा. उनका मानना है. भगवान सब देता है, लेकिन बहुत आसानी से नहीं. वह धक्के खिलाकर, सबक सिखाकर ही देता है. और उसका भी अपना मज़ा है.
पढ़ना और लिखना आगे बढ़ने का रास्ता
यह अनुभव हमें एक गहरी सीख देता है. जितना हम पढ़ेंगे, उतना ही लिखेंगे और उतना ही आगे बढ़ेंगे. किताबें न स़िर्फ ज्ञान देती हैं बल्कि हमारी सोच, हमारी दिशा और हमारे व्यक्तित्व को भी आकार देती हैं.
मुंबई का सबक
मुंबई हमें सिखाती है कि ज़िंदगी आसान नहीं है, लेकिन भाग-दौड़ और संघर्ष ही हमें मज़बूत बनाते हैं. यहाँ हर कोई रोज़ गिरता है, सँभलता है, और फिर नए जोश के साथ आगे बढ़ता है. यही जज़्बा इस शहर की सबसे बड़ी पहचान है.

सुरेश परिहार, लाइव वायर न्यूज, पुणे

5 thoughts on “मुंबई: जहां हर धक्का सिखाता है जीना

  1. वाह सुरेश जी, मुंबई की जद्दोजहद की तस्वीर को किस तरह से प्रस्तुत किया आपने। मुंबई मौका सबको देती है, कुछ चुन लेते हैं, और कुछ बैठकर अफसोस मनाते हैं। मुंबई के बारे में यह बिल्कुल सच है कि यहां कोई भूखा नहीं सो सकता । ना ही मुंबई में किसी को भी कोई काम की कमी है ।

    1. नारी मन के शक्ति को मुंबई शहर के भागदौड़ और जद्दोजहद वाले जीवन में एक अकेली लड़की अपने दम पर अपनी पहचान बनाती है । आपने सही कहा मुबई सपनों को नया रूप देता है।

  2. जिंदगी तो हर बड़े शहर में ऐसी ही है जैसे मुंबई में दिखाई गई है बहुत अच्छी रचना

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