
रीता मिश्रा, प्रसिद्ध लेखिका, भागलपुर (बिहार)
कैसे..?
ज़ख्मों को ज़िंदा करके
गम के सागर में डुबकी लगाकर
स्मृतियों में झूलकर
या फिर..
पावक के सीने पर चलकर
एहसास को जलाकर
या फिर..
खुशियों की राख पर लोटकर
अश्कों के सैलाब में तैरकर
या फिर..
बहते नीर को पीकर
खुद को ज़िंदा रखकर
कोई तो एक वजह हो
मुस्कुराने की..
नहीं है न..?
तो फिर फरमाइश क्यूं
की मुस्कुरा दो !