पुनर्जन्म…

मीनाक्षी वर्मा, प्रसिद्ध लेखिका, नई दिल्ली

साक्षी अपने माँ-बाप और छोटे भाई के साथ बस से मसूरी जा रही थी। रास्ते में पेड़-पहाड़ देखते हुए सभी लोग सफर का आनंद ले रहे थे। कुछ घंटों बाद वे मसूरी पहुँच गए।

साक्षी का छोटा भाई अनुज मंदिर देखकर बोला –
“चलो-चलो, पहले मंदिर चलते हैं!”

मम्मी ने कहा, “ठीक है, पहले दर्शन कर लेंगे, फिर आगे मसूरी घूमेंगे। वैसे भी अब थक गए हैं, होटल जाकर डिनर करेंगे और सो जाएंगे।”

साक्षी ने सामान बस से उतारकर मंदिर के अहाते में रख दिया और सब लोग मंदिर के अंदर चले गए। तभी एक बूढ़ा व्यक्ति साक्षी की तरफ भागता हुआ आया और चिल्लाकर बोला –
“बिटिया, तू आ गई! बिटिया, मैं तेरा इंतज़ार कर रहा था!”

साक्षी के पापा तुरंत आगे बढ़े, बोले-
“अरे, कौन है तू? पीछे हट!”

साक्षी घबरा गई। मम्मी ने भी कहा –
“अरे, यह कौन है? इसे यहाँ से हटाओ!”

लेकिन वह बूढ़ा फिर से जोर से बोला –
“अरे बिटिया, मैं हूँ तेरा बाबा! तू मेरी नूरी है!”

साक्षी के पापा झल्लाकर बोले –
“कौन नूरी? यह कोई नूरी-बूरी नहीं है!”

बूढ़े ने जेब से एक पुरानी तस्वीर निकाली और काँपते हाथों से दिखाते हुए बोला –
“देखो, यह मेरी नूरी है… बिल्कुल यही है!”

सभी ने तस्वीर देखी और चौंक गए .तस्वीर में वही चेहरा था, जो साक्षी का था। हूबहू वही!

बाबा की आँखों से आँसू बह निकले .“यह मेरी बेटी नूरी है। पच्चीस साल पहले मर गई थी, पर मुझे यकीन नहीं हुआ था। आज देखो, वह लौट आई है… तुम्हारी बेटी के रूप में।”

साक्षी की मम्मी ने तस्वीर देखते हुए कहा -“अरे, यह तो बिल्कुल मेरी बेटी जैसी है। लगता है इनको भ्रम हो गया है, इसलिए ऐसा कह रहे हैं।”

बाबा ने दृढ़ स्वर में कहा -“नहीं, मुझे कोई भ्रम नहीं है। यह मेरी बेटी नूरी ही है! कितने सालों बाद मेरा इंतज़ार खत्म हुआ…”

यह कहकर वह मंदिर के अंदर भगवान के आगे माथा टेकने चले गए।

साक्षी ने अपने पिता से धीरे से कहा-
“पापा, आपको इतना सख्त नहीं बोलना चाहिए था। देखिए, इस तस्वीर में इस लड़की के बाईं तरफ़ तिल है… और मेरे भी वही जगह तिल है। हो सकता है, मैं सच में उनकी बेटी रही हूँ।”

तभी भीड़ में से एक आदमी बोला –
“हम तो सालों से इस बाबा को यहीं मंदिर के सामने बैठा देखते हैं। कभी ऐसा नहीं हुआ कि उन्होंने किसी को यूँ बुलाया हो। ज़रूर कोई बात होगी।”

उधर बाबा ने मंदिर में जाकर घंटा बजाया… और वहीं गिर पड़े।
शोर मच गया। लोग दौड़े। भीड़ में से किसी ने कहा -“अरे, वो बाबा तो चल बसे!”

2 thoughts on “पुनर्जन्म…

  1. भावानात्मक कहानी । साक्षी के किरदार के बारे में सोचने लगी मैं।

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