पुणे बना ओपन लाइब्रेरी, 7 लाख लोगों ने पढ़ीं पुस्तकें

सड़कों से दफ्तरों तक चला ‘शांतता पुणेकर वाचत आहेत’ का जादू

सुरेश परिहार, पुणे

पुणे, ९ दिसंबर-एक दिन के लिए ‘पुस्तकों की राजधानी’ बन गया. शहर के स्कूलों, कॉलेजों, ऑफिसों, मेट्रो, बस स्टैंड, धार्मिक स्थलों और आईटी पार्कों में लोगों ने एक साथ किताबें खोलकर ऐसा माहौल बनाया, मानो पूरा शहर एक विशाल ओपन लाइब्रेरी में बदल गया हो. ग्रुप रीडिंग की लगभग १०,००० तस्वीरें सोशल मीडिया पर छा गईं और आयोजन को राजेश पांडे, रमेश पाटील, योगेश शिंदे, स्वाति देशमुख, प्रिया जाधव के नेतृत्व में ‘शांतता.. पुणेकर वाचत आहे’ अभियान को बड़ी सफलता मिली. शाम ५ बजे तक १ लाख ३५ हज़ार से ज़्यादा लोगों ने किताबें पढ़ीं और फोटो अपलोड करके वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया. सुबह ११ बजे से दोपहर १२ बजे के बीच ७० हज़ार से ज़्यादा लोगों ने किताबें पढ़ीं और अपनी फोटो वेबसाइट पर अपलोड कीं. इस पहल में १७ से २२ साल के युवाओं ने सबसे ज़्यादा हिस्सा लिया. महिलाओं की संख्या पुरुषों से कुछ हज़ार ज़्यादा रही.अब यह पहल सिर्फ पुणे तक ही सीमित नहीं रही. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से लेकर आम नागरिकों तक, सभी ने अपनी पसंदीदा किताबें पढ़ीं.
नेशनल बुक ट्रस्ट की ओर से १३ से २१ दिसंबर तक फर्ग्यूसन कॉलेज के मैदान में पुणे बुक फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है. इसी फेस्टिवल के अवसर पर मंगलवार को सुबह ११ बजे से दोपहर १२ बजे तक ‘शांतता… पुणेकर वाचत आहेत’ इस उपक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया.
स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, मेट्रो, धार्मिक स्थल, पब्लिक लाइब्रेरी, झचउ ऑफिस, सरकारी और प्राइवेट कार्यालय, रिक्शा स्टैंड, आईटी कंपनियां, इंडस्ट्री, सोशल ऑर्गनाइजेशन के ऑफिस इन सभी जगहों पर लोग अपनी पसंदीदा किताबें पढ़ते नज़र आए्.इस पहल में सुबह ११ बजे से दोपहर १२ बजे के बीच ७०,२३८ लोगों ने लिंक पर अपनी तस्वीरें अपलोड की हैं्.
इनमें से ३६,५२३ महिलाएं और ३३,७१५ पुरुष शामिल हैं. यह पहल गिनीज़ बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में वर्ल्ड रिकॉर्ड के रूप में दर्ज होगी. पुणे बुक फेस्टिवल के मुख्य संयोजक राजेश पांडे ने बताया कि इस वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए कोहिनूर ग्रुप के कृष्णकुमार गोयल का सहयोग मिला है और आवश्यक मदद लगातार दी जा रही है.

विधानसभा सत्र में भी पढ़ी गई किताबें
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर, उपसभापति अन्ना बनसोडे, विधान परिषद के चेयरमैन राम शिंदे, विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम गोर्हे, राज्यमंत्री माधुरी मिसाल, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण तथा अन्य मंत्रियों के साथ-साथ केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने किताब पढ़कर इस पहल में सक्रिय सहयोग किया.सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. सुरेश गोसावी, प्रो-वाइस चांसलर डॉ. पराग कालकर, गोविंद देवगिरी महाराज, सोमनाथ पाटिल, कृष्णकुमार गोयल सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने भी किताबें पढ़ीं ‘शांतता… पुणेकर वाचत आहोत’ इस पहल को पब्लिक जगहों पर बेहतरीन प्रतिसाद मिला. मिली कुल तस्वीरों में से करीब १० हज़ार फोटो स्कूल, कॉलेज और सोशल संस्थाओं में ग्रुप रीडिंग की हैं्. इसलिए किताबें पढ़कर इस पहल में हिस्सा लेने वाले कुल लोगों की संख्या साढ़े सात लाख से ज़्यादा है, यह जानकारी राजेश पांडे ने दी.
मुख्य संयोजक राजेश पांडे ने कहा कि पढ़ना सिर्फ एक पर्सनल आदत नहीं, बल्कि समाज को वैचारिक दिशा देने वाली शक्ति है. आज इस पहल में हाथों में किताबें लिए हज़ारों नागरिकों की सहभागिता से ‘रीडिंग कल्चर’ की ताकत एक बार फिर सामने आई है. पुणे बुक फेस्टिवल के माध्यम से हम युवाओं में वैचारिक बदलाव लाने का सपना देखते हैं, और आज के रिस्पांस ने उस सपने को और मज़बूत किया है,

इतनी तस्वीरें हुई अपलोड (शाम ५ बजे तक)
कुल फोटो: १,३५,२३८

महिलाओं की भागीदारी: ५२% (७०,३२३)
पुरुषों की भागीदारी: ४८% (६४,९१५)

3 thoughts on “पुणे बना ओपन लाइब्रेरी, 7 लाख लोगों ने पढ़ीं पुस्तकें

  1. अद्भुत… मोबाइल कलर पर हावी होता रीडिंग कलर …👏👏👏बहुत सुंदर

  2. बहुत गौरवशाली परंपरा शुरू की गई है। डिजिटल युग में पढ़ने की महत्ता को लौटा लाना प्रशंसनीय है। साधुवाद एक उत्तम प्रयास के लिए

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